प्राथमिक शिक्षा एवं एमडीएम निदेशक साहिला ने कहा, "हमने संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अंडों की आपूर्ति रोकने को कहा है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने बिहार सरकार को बर्ड फ्लू की बढ़ती घटनाओं को लेकर अलर्ट जारी किया है।"
साहिला ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला कार्यक्रम अधिकारियों को भी आदेश का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। उन्हें अंडे की जगह सेब और केले जैसे मौसमी फलों की आपूर्ति करने का निर्देश दिया गया है। निदेशक ने 13 मार्च को फोन पर टीएनआईई को बताया कि स्थिति सामान्य होने पर अंडों की आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। इसके अलावा सरकार ने बर्ड फ्लू के प्रसार को रोकने के लिए जागरूकता अभियान की आवश्यकता पर बल दिया है। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अंडे का सेवन संक्रमण के कारण लोगों के लिए घातक साबित हो सकता है। नियमों के अनुसार कक्षा एक से आठ तक के छात्रों को अंडे दिए जाते हैं। शाकाहारी छात्रों को मध्याह्न भोजन में केला और सेब परोसा जाता है।
27 फरवरी को पटना में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर)-पूर्वी क्षेत्र के अनुसंधान परिसर में एक पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू का पहला मामला सामने आया था।
नमूने भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भेजे गए, जहां जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई। पटना, भागलपुर और नवादा जिलों में अब तक बर्ड फ्लू की पुष्टि हो चुकी है।
बिहार में जांच लैब नहीं होने से संबंधित विभाग के अधिकारी चिंतित हैं। राज्य पशुपालन एवं मत्स्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "केंद्र सरकार के पास जांच लैब स्थापित करने का प्रस्ताव चार साल से अधिक समय से लंबित है। जांच लैब की सुविधा नहीं होने के कारण हमें नमूने भोपाल या कोलकाता भेजने पर मजबूर होना पड़ रहा है।"
विभाग ने राज्य में ऐसी जांच लैब स्थापित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14.92 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि हालांकि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की एक टीम ने कुछ महीने पहले पटना का दौरा किया था, लेकिन कोई प्रगति नजर नहीं आ रही है।
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