Vikramshila Setu: भागलपुर का विक्रमशिला सेतु सिर्फ एक पुल नहीं है। यह उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रोज़ाना लाखों लोगों की जिंदगी, कारोबार, इलाज, शिक्षा और आवाजाही को जोड़ने वाली धड़कन है। लेकिन 4 मई 2026 की सुबह जब सेतु का एक हिस्सा धंसकर गंगा में समा गया, तब पूरे बिहार में चिंता और गुस्सा दोनों फैल गया। अब घटना के कई दिनों बाद Border Roads Organisation (BRO) ने damaged हिस्से पर एक 49 मीटर लंबा Temporary Bailey Bridge तैयार कर दिया है। प्रशासन का दावा है कि 5 जून से छोटे वाहनों का परिचालन शुरू हो जाएगा, जिससे आम लोगों को राहत मिलेगी। लेकिन राहत के साथ-साथ कई बड़े सवाल अब भी हवा में तैर रहे हैं।
आखिर हुआ क्या था?
4 मई की सुबह विक्रमशिला सेतु के भागलपुर side के approach section में अचानक subsidence हुआ। देखते ही देखते करीब 33 मीटर हिस्सा नीचे धंस गया और bridge का portion गंगा में गिर गया।
घटना के बाद:
- यातायात पूरी तरह रोक दिया गया
- सीमांचल और झारखंड की connectivity प्रभावित हुई
- रोजाना लगभग 1 लाख लोगों की आवाजाही पर असर पड़ा
- भारी वाहनों की लंबी कतारें कई किलोमीटर तक लग गईं
स्थानीय लोगों का कहना था कि पिछले कुछ समय से bridge के आसपास कंपन और दरार जैसी समस्याएं महसूस हो रही थीं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
BRO ने क्या काम किया?
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार ने केंद्र से मदद मांगी। इसके बाद Border Roads Organisation (BRO) को emergency basis पर temporary connectivity restore करने की जिम्मेदारी दी गई।
1. Damage Assessment
BRO और technical teams ने सबसे पहले damaged area का survey किया।
- कितनी लंबाई collapse हुई
- मिट्टी का settlement कितना है
- temporary load कितना दिया जा सकता है
- कौन सा military-grade structure fit होगा
इन सबका तेजी से assessment किया गया।
2. Bailey Bridge Installation
BRO ने damaged हिस्से पर 49 मीटर लंबा Bailey Bridge लगाया।
Bailey Bridge एक modular steel bridge होता है जिसे:
- कम समय में assemble किया जा सकता है
- सेना और disaster situations में इस्तेमाल किया जाता है
- temporary traffic restore करने के लिए बनाया जाता है
इसे भारी concrete structure की तरह permanent नहीं माना जाता।
3. Ground Stabilisation
सिर्फ bridge रखना काफी नहीं था। जिस जमीन का हिस्सा धंसा था, वहां:
- soil compaction
- support strengthening
- temporary foundation balancing
जैसे काम किए गए ताकि bridge के नीचे दोबारा settlement न हो।
4. Bhoomi Pujan और Rapid Deployment
Construction शुरू होने से पहले BRO अधिकारियों और पुजारियों द्वारा bhoomi pujan किया गया। इसके बाद military-style fast deployment mode में bridge assembly शुरू हुई। BRO की teams लगातार day-night shifts में काम कर रही हैं ताकि 5 जून की deadline पूरी हो सके।
क्या 5 जून से सब सामान्य हो जाएगा?
नहीं। यही सबसे बड़ा भ्रम है जिसे समझना जरूरी है।
5 जून से सिर्फ:
- छोटे वाहन
- बाइक
- कार
- जरूरी सेवाएं
जैसे limited traffic को अनुमति मिलने की संभावना है।
Heavy trucks और full-scale commercial movement तुरंत शुरू होना मुश्किल माना जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल: 13 पिलर और 3 स्लैब का क्या?
यहीं से मामला सिर्फ temporary राहत से निकलकर structural crisis में बदल जाता है।
Sources और अधिकारियों के अनुसार:
- bridge के 13 pillars प्रभावित बताए जा रहे हैं
- 3 slabs में structural damage की आशंका है
अगर यह पूरी तरह सही पाया गया, तो मामला सिर्फ approach collapse का नहीं बल्कि deeper structural weakness का हो सकता है।
लोगों के मन में उठ रहे सवाल
मार्च 2026 में maintenance हुआ था, फिर collapse कैसे?
यही सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है।
Bridge की हाल ही में maintenance हुई थी। उसके बावजूद:
- जमीन धंस गई
- structure fail हुआ
- connectivity टूट गई
तो क्या maintenance सिर्फ surface-level था?

क्या overloading जिम्मेदार है?
विक्रमशिला सेतु पर वर्षों से भारी वाहनों का दबाव बढ़ता गया है।
कई स्थानीय लोग दावा करते हैं कि:
- capacity से ज्यादा load
- लगातार heavy movement
- vibration pressure
ने bridge को कमजोर किया।
क्या गंगा के कटाव ने नींव कमजोर कर दी?
Experts का मानना है कि:
- river scouring
- foundation erosion
- लगातार जलधारा का pressure
भी pillars की stability पर असर डाल सकता है।
क्या corruption या oversight failure हुआ?
जब एक ही bridge पर बार-बार repair हो और फिर भी collapse हो जाए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसी बीच:
- Road Construction Department ने एक Executive Engineer को suspend कर दिया है
- लेकिन जनता अब सिर्फ suspension नहीं, accountability चाहती है
क्या अब नया पुल बनना चाहिए?
कई engineers और स्थानीय लोग मानते हैं कि:
“विक्रमशिला सेतु अब अपने original design lifespan और traffic load pressure से जूझ रहा है।”
Bridge जिस समय बना था, उस समय:
- traffic volume कम था
- freight movement सीमित था
आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
इसीलिए अब parallel bridge या नया mega structure बनाने की मांग फिर तेज हो गई है।
फिलहाल सच्चाई क्या है?
BRO ने तेजी दिखाकर बिहार को तत्काल राहत जरूर दी है।
लेकिन Bailey Bridge सिर्फ emergency arrangement है।
असल परीक्षा अब शुरू होगी:
- Structural audit report
- Permanent repair plan
- Damaged pillars की स्थिति
- Future load capacity
- Accountability
इन सब पर आने वाले महीनों में फैसला होगा।
क्योंकि विक्रमशिला सेतु का मामला अब सिर्फ एक bridge repair का नहीं, बल्कि बिहार की infrastructure planning और oversight system की credibility का बन चुका है।








