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बिहार सरकार के 100 दिन: ‘सहयोग कार्यक्रम’ बना प्रशासनिक एजेंडा का केंद्र

On: July 22, 2026 10:39 PM
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बिहार सरकार के 100 दिन: 'सहयोग कार्यक्रम' बना प्रशासनिक एजेंडा का केंद्र

बिहार पटना: सम्राट चौधरी सरकार अपने पहले 100 दिन पूरे करने की तैयारी में है। इस दौरान सरकार ने जिस पहल को अपनी सबसे प्रमुख प्रशासनिक उपलब्धि के रूप में सामने रखा है, वह है ‘सहयोग कार्यक्रम’। इसे एक ऐसे शिकायत निवारण तंत्र के रूप में विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से आम नागरिकों की लंबित समस्याओं को स्थानीय स्तर से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

सरकार का कहना है कि कई मामलों में लोगों को सरकारी दफ्तरों के लगातार चक्कर लगाने के बावजूद समय पर समाधान नहीं मिल पाता था। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सहयोग कार्यक्रम शुरू किया गया, ताकि शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया अधिक जवाबदेह और समयबद्ध बन सके।इस व्यवस्था के तहत हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर लगाए जाते हैं। इन शिविरों में विभिन्न विभागों के अधिकारी गांवों में पहुंचकर लोगों से आवेदन और शिकायतें प्राप्त करते हैं। जिन मामलों का समाधान वहीं नहीं हो पाता, उन्हें आगे राज्य स्तर पर भेजा जाता है।

इसके बाद हर महीने के दूसरे मंगलवार, या 14 तारीख को, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पटना स्थित बिहार सचिवालय के सहयोग हॉल में ऐसे लंबित मामलों की समीक्षा करते हैं। बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहते हैं और शिकायतों के निस्तारण के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाते हैं।कार्यक्रम के दायरे में भूमि म्यूटेशन, जमीन की मापी से जुड़े विवाद, राशन कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, जाति और आय प्रमाण पत्र, बिजली बिल संबंधी शिकायतें तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसे कई नागरिक सेवाओं से जुड़े मामले शामिल हैं।

सरकार ने विभागों को निर्देश दिया है कि सहयोग कार्यक्रम के तहत प्राप्त शिकायतों का निपटारा 30 दिनों के भीतर किया जाए। इसके लिए ‘सहयोग पोर्टल’ भी तैयार किया गया है, जहां आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकती है। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी आवेदन में दस्तावेज अधूरे हों तो उसे सीधे खारिज करने के बजाय आवेदक को आवश्यक जानकारी देकर प्रक्रिया पूरी करने में मदद की जाए। शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है।सहयोग कार्यक्रम के अलावा सरकार ने अपने पहले 100 दिनों के दौरान सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और ऊर्जा क्षेत्र में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और दिव्यांगजनों सहित 97.84 लाख लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत 1,423.94 करोड़ रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि हर महीने की 10 तारीख तक पेंशन की राशि लाभार्थियों के खाते में पहुंच जाए।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री सोलर योजना के तहत पात्र परिवारों को रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि योजना के माध्यम से पात्र उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिल सकेगा।सरकार अपने पहले 100 दिनों का आकलन कर रही है। ऐसे में सहयोग कार्यक्रम को उसकी सबसे प्रमुख प्रशासनिक पहल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। आने वाले समय में इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शिकायतों का समाधान तय समयसीमा में कितना प्रभावी ढंग से हो पाता है और इसका लाभ आम लोगों तक किस स्तर पर पहुंचता है।

KhabarX Desk

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