श्रीकाकुलम, आंध्र प्रदेश: कार्तिक मास की पवित्र एकादशी का दिन, जो भक्ति और उत्सव का प्रतीक होना चाहिए था, आज आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में एक भयानक त्रासदी में बदल गया। काशीबुग्गा स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में दर्शन के लिए जुटी बेकाबू भीड़ में मची भगदड़ ने 9 श्रद्धालुओं की जान ले ली, जिनमें आठ महिलाएं और एक 13 वर्षीय किशोर शामिल हैं।
यह हादसा महज़ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक चूकों और ज़मीनी हकीकत की अनदेखी का नतीजा नज़र आ रहा है।
कैसे भक्ति का सैलाब मातम में बदला?
घटना शनिवार सुबह करीब 11:45 बजे की है। ‘चिन्ना तिरुपति’ के नाम से मशहूर इस निजी मंदिर में एकादशी के कारण हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंदिर की क्षमता जहाँ महज़ कुछ हज़ार लोगों की है, वहीं मौके पर 15,000 से अधिक लोग जमा हो गए थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंदिर की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर लगी एक लोहे की रेलिंग भीड़ के भारी दबाव के कारण टूटकर गिर गई। इसके बाद जो हुआ, वह दिल दहला देने वाला था। लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे, जिससे घबराहट (पैनिक) फैल गई और भगदड़ मच गई। कई लोग सीढ़ियों से लगभग छह फीट नीचे गिर गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।
सात लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो की मौत अस्पताल में इलाज के दौरान हुई। 15 से अधिक घायलों का पलासा के नजदीकी अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है।
ज़मीनी हकीकत: लापरवाही किसकी?
KhabarX की पड़ताल में इस हादसे के पीछे कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर “पब्लिक इंटरेस्ट” यानी जन सुरक्षा से जुड़े हैं।
- निजी मंदिर, सरकारी निगरानी नदारद: यह मंदिर राज्य के धर्मस्व विभाग (Endowments Department) के तहत पंजीकृत नहीं है। यह एक निजी तौर पर संचालित मंदिर है, जिसे हाल ही में चार महीने पहले ही खोला गया था।
- न इजाज़त, न इंतज़ाम: श्रीकाकुलम के एसपी के.वी. महेश्वर रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि मंदिर प्रबंधन ने इतने बड़े आयोजन के लिए पुलिस से किसी तरह की अनुमति नहीं ली थी और न ही पुलिस बंदोबस्त (सुरक्षा व्यवस्था) की मांग की थी।
- एक ही रास्ता, एंट्री भी, एग्जिट भी: सबसे खतरनाक बात यह थी कि मंदिर में प्रवेश करने और बाहर निकलने के लिए एक ही संकरे रास्ते का इस्तेमाल हो रहा था। यह भीड़ प्रबंधन के बुनियादी नियमों का खुला उल्लंघन है।
- अधूरा निर्माण: रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि जिस इलाके में श्रद्धालु जमा थे, वहाँ अभी भी निर्माण कार्य चल रहा था।
यह साफ है कि हज़ारों लोगों की ज़िंदगी को बिना किसी सुरक्षा इंतज़ाम के भगवान भरोसे छोड़ दिया गया था।
सियासत और संवेदना
हादसे की खबर मिलते ही राष्ट्रीय स्तर पर शोक की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “भगदड़ से आहत” होने की बात कही और मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने घटना को “बेहद हृदयविदारक” बताते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने राज्य भर के मंदिरों में भीड़ प्रबंधन के उपायों को मज़बूत करने का निर्देश दिया है।
विपक्ष ने भी सरकार को घेरा है। पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने इसे चंद्रबाबू नायडू प्रशासन की “अक्षमता” और “घोर लापरवाही” का परिणाम बताया है।यह त्रासदी एक बार फिर यह कड़वा सवाल छोड़ गई है कि आखिर आस्था के नाम पर जुटने वाली भीड़ की सुरक्षा के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे? क्या निजी मंदिर प्रबंधन को हज़ारों जिंदगियों के साथ खिलवाड़ करने की छूट दी जा सकती है? जांच तो होगी, लेकिन 9 जिंदगियों के लौटने का कोई रास्ता नहीं है।





