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Bihar : नीतीश युग का अंत? 14 अप्रैल को बिहार में सत्ता परिवर्तन के संकेत

On: April 12, 2026 9:57 PM
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Bihar : में कई हफ्तों की राजनीतिक अनिश्चितता के बाद आखिरकार एक तारीख तय हो गई है — 14 अप्रैल। राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने के बाद माना जा रहा है कि नीतीश कुमार इसी दिन बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके साथ ही राज्य में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ होगा और दो दशक से ज्यादा समय से चली आ रही एक राजनीतिक युग का अंत भी हो सकता है।

14 अप्रैल का महत्व

14 अप्रैल सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक और सामाजिक महत्व काफी बड़ा है। इसी दिन भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती होती है, जो खासकर बिहार जैसे सामाजिक रूप से संवेदनशील राज्य में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।इसके अलावा, हिंदू पंचांग के अनुसार चलने वाला ‘खरमास’ भी 14 अप्रैल को समाप्त होता है। इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए उचित नहीं माना जाता, इसलिए इस तारीख को राजनीतिक फैसलों के लिए अनुकूल माना जा रहा है।

नीतीश कुमार का लंबा राजनीतिक सफर

नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से हटना बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि उनकी पार्टी जेडीयू के नेताओं का कहना है कि वे पटना में ही रहेंगे और संसद सत्र के दौरान दिल्ली आते-जाते रहेंगे।

नीतीश कुमार ने पहली बार 2005 में मुख्यमंत्री पद संभाला था और तब से वह बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री बने। उन्होंने अपने कार्यकाल में आरजेडी के ‘जंगलराज’ को खत्म करने और विकास की दिशा में राज्य को आगे बढ़ाने का दावा किया।उनका राजनीतिक करियर 1985 में विधायक बनने से शुरू हुआ था। बाद में वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे। अब राज्यसभा जाने का उनका फैसला भी ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि वह पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान ही संसद के उच्च सदन में जाने का निर्णय लिया। उन्होंने 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जो राज्यसभा सदस्य बनने के लिए जरूरी प्रक्रिया थी। हालांकि संविधान के अनुसार वह छह महीने तक बिना विधायक या विधान पार्षद बने भी मुख्यमंत्री रह सकते थे, लेकिन उन्होंने पहले ही पद छोड़ने का फैसला किया।

अगला मुख्यमंत्री कौन?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। एनडीए में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और अब उसके पास पहली बार मुख्यमंत्री पद संभालने का मौका है।2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 89 सीटें जीतकर पहली बार सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया, जबकि जेडीयू को 85 सीटें मिलीं। कुल मिलाकर एनडीए ने 243 में से 202 सीटें जीतकर मजबूत बहुमत हासिल किया।

मुख्यमंत्री पद के लिए बीजेपी के तीन बड़े नाम सामने आ रहे हैं:

  • सम्राट चौधरी — वर्तमान उपमुख्यमंत्री और कुशवाहा समुदाय के बड़े नेता, जिन्हें सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
  • नित्यानंद राय — केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष।
  • दिलीप कुमार जायसवाल — तीन बार एमएलसी रह चुके और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष।

हालांकि बीजेपी अक्सर अपने फैसलों से चौंकाती रही है, इसलिए अंतिम नाम कुछ भी हो सकता है।

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नीतीश कुमार ने 11 अप्रैल, 2026 को अपना सामान 1 अणे मार्ग स्थित आधिकारिक आवास से पटना के 7 सर्कुलर रोड स्थित अपने नए आवास में स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। (संतोष कुमार/एचटी फोटो)

वंशवादी राजनीति की भी चर्चा

इसी बीच जेडीयू के कुछ नेता नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने पार्टी जॉइन की है, जिससे उन्हें भविष्य के नेतृत्व के तौर पर देखा जा रहा है।

विपक्ष का हमला

विपक्ष, खासकर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आरजेडी, एनडीए सरकार पर लगातार सवाल उठा रही है। उनका आरोप है कि बिहार में दो महीने से कैबिनेट की बैठक नहीं हुई और सरकार अनिश्चितता की स्थिति में काम कर रही है।

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