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दिल्ली में 14 साल के साहिल की मौत: बारात में नकली नोट उठाने पर CISF जवान की गोली

On: December 11, 2025 8:19 PM
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दिल्ली के शाहदरा में रहने वाली 42 वर्षीय निशा अंसारी आज भी हर रात नौ बजते ही दरवाज़े की ओर देखती रह जाती हैं। उन्हें ऐसा महसूस होता है मानो उनका बेटा साहिल बाहर खड़ा होकर कह रहा हो—
अम्मी…दरवाज़ा खोलो, मैं आ गया।

निशा जानती हैं कि साहिल अब कभी वापस नहीं आएगा, लेकिन एक माँ का दिल अब भी उम्मीद से निकल नहीं पाया। वह कहती हैं कि इंतज़ार करते-करते अक्सर एक बजे तक नींद नहीं आती।

दर्द की बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने अपने बच्चे को खोया है—पिछले पाँच वर्षों में वह अपने दो बेटों को दफना चुकी हैं।

2020 में बीमारी ने उनके 18 वर्षीय बड़े बेटे की जान ले ली थी।और 29 नवंबर 2025 की रात, CISF के हेड कॉन्स्टेबल मदन गोपाल तिवारी की पिस्तौल से निकली गोली ने उनके 14 वर्षीय बेटे साहिल को भी उनसे छीन लिया।अभियुक्त पक्ष का कहना है कि गोली गलती से चली थी।
लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप बिल्कुल अलग है—उनके अनुसार, बारात में जब लोग नोट उड़ाते हैं तो बच्चे उन्हें जमीन से उठाते हैं, और साहिल भी वहीं सड़क पर पड़े नोट इकट्ठे कर रहा था।परिवार का आरोप है कि यह बात CISF जवान मदन गोपाल तिवारी को पसंद नहीं आई।
उन्होंने पहले साहिल को मारा, फिर उस पर गोली दाग दी।निशा अंसारी का सीधा सवाल है—बारात में पैसे तो इसलिए ही उड़ाए जाते हैं कि बच्चे उठाएँ। ऊपर से वो नोट असली भी नहीं थे। नकली कागज़ पर मेरे बच्चे की जान ले ली। ऐसी बंदूक सरकार किसलिए देती है? आतंकवादियों पर चलाने के लिए या मासूमों पर?”

घर नहीं लौट पाया साहिल

साहिल सिर्फ 14 साल का था।पिता की तबीयत छह महीने से ख़राब रहने लगी, शरीर का एक हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया।
घर की ज़िम्मेदारी अचानक ही साहिल के कंधों पर आ गई, और वह पास की किराने की दुकान पर काम करने लगा।उस रात भी वह रोज़ की तरह दुकान बंद कर घर लौट रहा था।उसके पिता सिराजुद्दीन बताते हैं—
रात करीब नौ बजे छोटे बेटे ने रोते-रोते कहा—पापा, साहिल को गोली मार दी… मैंने सोचा मज़ाक कर रहे हैं। लेकिन सच था। उसकी मां भागकर पहुँची तो कम्युनिटी हॉल के पास साहिल खून से लथपथ गिरा था। वो मर चुका था।”

घटना से जुड़े वीडियो में साहिल सड़क पर गिरा दिखता है, सिर में गहरा घाव साफ दिखाई देता है।

निशा कहती हैं—मैं उसे देखकर वहीं बेहोश हो गई। कोई आगे बढ़कर अस्पताल ले जाने को तैयार नहीं था। हम खुद उसे हेडगेवार अस्पताल ले गए, पर डॉक्टर ने कहा—बहुत देर हो चुकी थी।

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साहिल कैसा बच्चा था?

मूल रूप से झारखंड के गोड्डा ज़िले से आए इस परिवार का घर शाहदरा में एक बेहद छोटा कमरा है।पिता दिहाड़ी मज़दूर हैं और आजकल मुश्किल से कोई हल्का-फुल्का काम कर पाते हैं।साहिल घर की आर्थिक रीढ़ जैसा था।उसकी मां कहती हैं—
मेरा बेटा किसी को चींटी तक नहीं मार सकता था। न झगड़ा, न शोर, गाली तो उसके मुंह से कभी नहीं निकली। बस यही सोचता था कि पापा की दवा कैसे चलेगी, घर कैसे संभलेगा।”

निशा अब एक ही बात दोहराती हैं—जिसने मेरे बच्चे को मारा, उसे या तो फाँसी मिले या उम्रकैद।”

लगाए जा रहे हैं झूठे आरोप

दिल्ली पुलिस के अनुसार, गोली चलने के बाद CISF जवान मदन गोपाल तिवारी मौके से भाग गया था। सीमापुरी के एसीपी और मानसरोवर पार्क थाना प्रभारी की टीम ने रात भर तलाश की और 30 नवंबर को उसे इटावा (UP) से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि बारात के दौरान उड़ाए गए नोट जब बच्चों ने उठाने शुरू किए, तो गुस्से में उसने एक बच्चे पर गोली चला दी।”घटना में इस्तेमाल हथियार एक लाइसेंसी .32 बोर पिस्तौल थी।

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सीआईएसएफ़ ने कोई कार्रवाई की?

अभियुक्त के भाई सोनू का कहना है कि आरोप झूठे हैं।वह दावा करते हैं भीड़ में गलती से ट्रिगर दब गया। जानबूझकर नहीं मारा। वह शराब को हाथ भी नहीं लगाता।”परिवार अब कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहा है।CISF की तरफ़ से जवाब आया है किअवकाश के दौरान होने वाली व्यक्तिगत घटनाओं पर विभाग आधिकारिक टिप्पणी नहीं करता.
रूलबुक के अनुसार, किसी जवान को अगर 48 घंटे से अधिक हिरासत में रखा जाता है तो उसे निलंबित किया जा सकता है।

न्याय की मांग

फिलहाल मामला अदालत और पुलिस जांच के दायरे में है।पीड़ित परिवार बेहद साधारण हालात में जी रहा है और बस एक ही बात कहता है—हम गरीब लोग हैं… हमें बस अपने बच्चे के लिए न्याय चाहिए। उसने किसी का क्या बिगाड़ा था?

Mission Aditya

Founder – KhabarX | Patriotic Youth Ambassador (VPRF)Amplifying unheard stories, questioning silence, and building journalism powered by truth, tech & youth. Purpose-led. Change-driven.

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