नई दिल्ली:
घाटी में लगातार हो रहे आतंकी हमलों ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच जब भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप 2025 का शेड्यूल सामने आया, तो एक बार फिर बहस छिड़ गई—क्या आतंक के साए में खेलना सही है?
BCCI ने इस मुकाबले की पुष्टि कर दी है, लेकिन सोशल मीडिया से लेकर संसद तक एक ही सवाल गूंज रहा है:
क्या अब भी क्रिकेट को ‘सिर्फ एक खेल’ माना जा सकता है?
इतिहास गवाह है: जब खेल और खून की लकीरें मिलीं
भारत-पाकिस्तान क्रिकेट का इतिहास सिर्फ रनों और विकेटों का नहीं है—बल्कि हर बड़े आतंकी हमले के बाद यह रिश्ता और भी पेचीदा हो गया है:
- 2008, मुंबई हमला: इस आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट संबंध पूरी तरह खत्म कर दिए। उसके बाद से दोनों देश सिर्फ ICC या एशिया कप जैसे टूर्नामेंट्स में ही भिड़ते हैं।
- 2016, पठानकोट हमला: उस समय भी भारत में ज़बरदस्त विरोध हुआ। BCCI को हाई कोर्ट में घसीटा गया कि “आतंकी देश के साथ क्रिकेट कैसे हो सकता है?”
- 2019, पुलवामा हमला: 40 जवानों की शहादत के बाद देश भर में गुस्सा फूटा। भारत ने पाकिस्तान को विश्व कप 2019 से बाहर कराने की कोशिश की, लेकिन ICC के नियमों के चलते वो संभव नहीं हुआ।
इस बार क्या अलग है?
2025 में हो रहा एशिया कप ऐसे वक्त में हो रहा है जब:
- कश्मीर में हाल ही में कई आतंकी हमलों में जवान शहीद हुए हैं।
- पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ की खबरें लगातार आ रही हैं।
- देशभर में “no cricket with terror” की मांग दोबारा ज़ोर पकड़ रही है।
लेकिन इसके बावजूद भारत और पाकिस्तान का मुकाबला जारी रहेगा — क्योंकि यह एक ICC-Approved multilateral tournament है।
सरकार क्या कर सकती है?
तकनीकी तौर पर, भारत सरकार BCCI को निर्देश दे सकती है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
- BCCI इसे “purely sporting decision” बता रहा है।
- सरकार ने पहले भी कई बार “खेल को राजनीति से अलग रखने” की नीति अपनाई है।
लेकिन सवाल ये उठता है कि जब दोनों देशों के बीच राजनीतिक बातचीत बंद हो चुकी है, तो cricket जैसे हाई-विज़िबिलिटी platform को कैसे allow किया जा रहा है?
जनभावनाएं बनाम खेल भावना: टकराव और विकल्प
देश की बड़ी आबादी, खासकर जवानों के परिवार, यह पूछ रहे हैं कि क्या भारत के लिए ये सिर्फ एक खेल है?
कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पाकिस्तान को हर बार international मंच देने से “normalcy” का illusion बनता है — जो उसके खिलाफ जा रही अंतरराष्ट्रीय छवि को कम करता है।भारत-पाक मैच सिर्फ क्रिकेट नहीं होता।
यह एक भावनात्मक, राजनीतिक और कूटनीतिक घटना होती है, जिसकी गूंज मैदान से बाहर बहुत दूर तक जाती है।
सरकार की चुप्पी और BCCI की सफाई के बीच, जनभावनाएं इस बार सवालों में हैं।
और यही सवाल KhabarX उठाता है —
“क्या देश की ज़मीन पर खून बहने के बाद भी बल्ला चलना चाहिए?”





