जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने की छठी वर्षगांठ से पहले माहौल एक बार फिर तनावपूर्ण हो गया है। एक ओर जहां घाटी में चुप्पी और अनिश्चितता का माहौल है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। स्थानीय लोग इसे लेकर आशंकित हैं कि इस बार की बरसी पर हालात सामान्य रहेंगे या फिर कोई बड़ी हलचल हो सकती है।
5 अगस्त: एक संवेदनशील तारीख
2019 में 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था। तब से यह तारीख राजनीतिक, भावनात्मक और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन चुकी है।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
- CRPF, BSF, सेना और स्थानीय पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है
- ड्रोन निगरानी, इंटरनेट ट्रैफिक की मॉनिटरिंग और संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लागू
- श्रीनगर, पुलवामा, बारामूला और शोपियां में संभावित आतंकी गतिविधियों को देखते हुए ऑपरेशन तेज़
जनता में कैसा है माहौल?
स्थानीय निवासी खुलकर कुछ नहीं कह रहे लेकिन अंदरूनी रूप से:
- व्यापारियों में अस्थिरता को लेकर चिंता
- युवाओं में नौकरी, इंटरनेट और सुरक्षा को लेकर नाराज़गी
- कई लोग इस दिन को ‘ब्लैक डे’ तो कई इसे ‘न्यू बिगिनिंग’ मानते हैं
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं
- नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी जैसे दलों ने केंद्र पर “लोकतंत्र खत्म करने” का आरोप लगाया है
- भाजपा इसे “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की दिशा में ऐतिहासिक कदम कहती है
- महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट में लिखा — “जनता के अधिकारों को बहाल किए बिना विकास संभव नहीं”
संभावित खतरे और एजेंसियों की तैयारी
- IB और RAW की रिपोर्ट्स में घुसपैठ की कोशिशों की आशंका
- घाटी में छोटे IED धमाकों और टारगेटेड किलिंग की आशंका जताई जा रही है
- सेना ने LoC पर अलर्ट बढ़ा दिया है और सर्च ऑपरेशन तेज कर दिए गए हैं
अनुच्छेद 370 की बरसी एक कानूनी फैसला भर नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक स्मृति का प्रतीक बन चुका है। इस तारीख के आसपास जम्मू-कश्मीर का हर नागरिक, सियासी दल और सुरक्षा एजेंसी सतर्क रहती है।
कश्मीर आज भी शांत है, लेकिन यह सन्नाटा किसी तूफान से पहले की खामोशी तो नहीं?





