मालदा: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।CCTV फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि कैसे 34 मोटरसाइकिलों का झुंड 7 न्यायिक अधिकारियों की गाड़ियों का पीछा कर रहा है।
यह घटना बुधवार देर रात की है, जब ये अधिकारी सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के निर्देश पर कालीचक क्षेत्र में वोटर शिकायतों की सुनवाई के लिए पहुंचे थे।
9 घंटे तक घेराव, फिर जान बचाकर भागे अधिकारी
जानकारी के अनुसार, अधिकारियों की गाड़ियों को एक बड़ी भीड़ ने घेर लिया और करीब 9 घंटे तक उन्हें वहां रोके रखा गया।जब किसी तरह वे वहां से निकल पाए, तब भी खतरा खत्म नहीं हुआ—34 बाइक सवारों ने उनकी गाड़ियों का हाई-स्पीड पीछा शुरू कर दिया।CCTV फुटेज (रात 11:48 बजे) में साफ दिखता है कि10 गाड़ियों के काफिले को बाइक सवार लगातार दौड़ा रहे हैं।
कार के अंदर का डर – महिला अधिकारी की आवाज़
एक कार के अंदर रिकॉर्ड हुई ऑडियो इस घटना की भयावहता को और बढ़ा देती है।एक महिला अधिकारी घबराई हुई आवाज़ में अपने परिवार से कहती सुनाई देती हैं कि:
- उन्हें डर लग रहा है
- जल्दी से जल्दी कुछ करने को कहती हैं
कार में बैठे अधिकारी ड्राइवर को लगातार निर्देश दे रहे थे:
- गाड़ी तेज चलाओ
- हेडलाइट ब्लिंक करते रहो
- किसी तरह वहां से निकलो

पुलिस पर भी सवाल – 500 मीटर में लगे 10 घंटे
इस घटना में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- पुलिस को मौके पर पहुंचने में करीब 10 घंटे लगे
- जबकि दूरी सिर्फ 500 मीटर थी
आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही कार्रवाई तेज हुई।
चुनाव से पहले गरमाई राजनीति
यह घटना अब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पहली चुनावी रैली में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा:
यह ‘महा जंगलराज’ का उदाहरण है, जहां जज और संवैधानिक प्रक्रिया भी सुरक्षित नहीं हैं।”
उन्होंने ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लगाया कि:
- न्यायिक प्रक्रिया को दबाने की कोशिश हो रही है
- जब कानून का शिकंजा कसता है, तो संस्थाओं को निशाना बनाया जाता है
TMC का पलटवार
वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे
“चुनावी हताशा का बयान” बताया है।
कब होंगे चुनाव?
- मतदान: 23 अप्रैल और 29 अप्रैल
- नतीजे: 4 मई









