बिहार की राजनीति इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर आगामी राज्यसभा चुनाव लड़ने की अटकलों ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। जैसे ही यह खबर सामने आई, पटना में मुख्यमंत्री आवास के बाहर जेडीयू के युवा कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जमा हो गई। देर रात तक कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और अपने नेता के समर्थन में प्रदर्शन किया।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि होली जैसे बड़े त्योहार के बीच इस तरह की खबरों ने उनके उत्साह को कम कर दिया है। जेडीयू समर्थकों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाया जाता है तो यह बिहार के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा।
जेडीयू कार्यकर्ताओं का विरोध, मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन
खबरों के सामने आने के बाद जेडीयू के युवा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर जुट गए। उन्होंने “नीतीश कुमार जिंदाबाद”, “विकास पुरुष जिंदाबाद” और “प्रशासन बाबू जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए।
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना था कि पिछले दो दशकों में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने विकास और सुशासन के कई नए आयाम स्थापित किए हैं। ऐसे में अगर उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाया जाता है तो राज्य की राजनीतिक स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे यहां किसी विरोध के लिए नहीं बल्कि अपने नेता के प्रति समर्थन जताने और संभावित षड्यंत्रों के खिलाफ आवाज उठाने आए हैं।
“षड्यंत्र करने वाले सुधर जाएं, नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन”
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने कड़ी चेतावनी भी दी। उनका कहना है कि अगर कोई राजनीतिक ताकतें नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की कोशिश कर रही हैं तो उन्हें अपने कदम पीछे खींच लेने चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो बिहार में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है। कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में राज्य में अराजकता का माहौल बन सकता है और बड़ी संख्या में लोग, खासकर महिलाएं, सड़कों पर उतर सकती हैं।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे यहां सिर्फ एक संदेश देने आए हैं कि नीतीश कुमार के खिलाफ किसी भी तरह की साजिश को जनता स्वीकार नहीं करेगी।
निशांत कुमार के सवाल पर कार्यकर्ताओं का जवाब
प्रदर्शन के दौरान जब पत्रकारों ने निशांत कुमार के बारे में सवाल पूछा तो कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल चर्चा केवल नीतीश कुमार के बारे में है।
उन्होंने कहा कि वे यहां केवल अपने मुख्यमंत्री के समर्थन में आए हैं और उनका पूरा ध्यान इस बात पर है कि नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में सक्रिय बने रहें।
नीतीश कुमार का भावुक संदेश
इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अपने समर्थकों के नाम एक भावुक संदेश साझा किया है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से बिहार की जनता ने उन पर भरोसा जताया है और उसी विश्वास के बल पर उन्होंने राज्य की सेवा करने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा कि जनता के समर्थन की ताकत से ही बिहार आज विकास और सम्मान का नया उदाहरण पेश कर रहा है। नीतीश कुमार ने इसके लिए बिहार की जनता के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
अपने संदेश में उन्होंने यह भी बताया कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के सदस्य बनें। इसी क्रम में इस बार वे राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा रखते हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार की जनता के साथ उनका रिश्ता आगे भी बना रहेगा और वे एक विकसित बिहार के निर्माण के लिए हमेशा काम करते रहेंगे।
“नई सरकार को मिलेगा मेरा पूरा सहयोग”
अपने संदेश में नीतीश कुमार ने यह भरोसा भी दिलाया कि अगर राज्य में नई सरकार बनती है तो उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा। उन्होंने कहा कि बिहार के विकास का जो संकल्प उन्होंने लिया है, वह आगे भी जारी रहेगा।
उनका यह बयान इस बात का संकेत देता है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
16 मार्च को राज्यसभा चुनाव
बता दें कि 16 मार्च को बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं। इन चुनावों के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च तय की गई है, जबकि चुनाव परिणाम 20 मार्च को घोषित किए जाएंगे।
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक नितिन नवीन का नाम भी बीजेपी के संभावित राज्यसभा उम्मीदवारों में चर्चा में है। अगर ऐसा होता है तो वे भी राज्य की राजनीति से निकलकर केंद्र की राजनीति में कदम रख सकते हैं।
बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत
राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं ने बिहार की राजनीति को फिर से गरमा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों में राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल सभी की नजरें राज्यसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।








