कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके वैचारिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा सत्ता व्यवस्था का मूल उद्देश्य देश में सत्ता का केंद्रीकरण करना है। केरल के कोच्चि स्थित एर्नाकुलम में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति इसके बिल्कुल विपरीत है, जो सत्ता के विकेंद्रीकरण और आम लोगों को अधिकार देने की सोच पर आधारित है।
राहुल गांधी ने दावा किया कि BJP और RSS की राजनीति आम जनता की आवाज़ को दबाने पर केंद्रित है, जबकि कांग्रेस जनता की भागीदारी और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में विश्वास रखती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केरल की जनता को डराया या चुप नहीं कराया जा सकता।
कुछ चुनिंदा कॉरपोरेट्स के लिए काम कर रही है सरकार’
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने बिना किसी का नाम लिए यह आरोप लगाया कि BJP देश में केवल कुछ गिने-चुने बड़े कॉरपोरेट समूहों को आगे बढ़ाना चाहती है। उन्होंने कहा कि ये कॉरपोरेट्स धीरे-धीरे भारत की राष्ट्रीय संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं और सरकार उनकी नीतियों के अनुसार फैसले ले रही है।
राहुल गांधी ने कहा,BJP और RSS की सोच यह है कि भारत के लोग सवाल न पूछें, सिर्फ आदेश मानें। वे नहीं चाहते कि देश की जनता अपनी बात कहे या सत्ता से सवाल करे।
उनके अनुसार, सत्ता और पूंजी के इस गठजोड़ का सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिक, छोटे व्यापारी, किसान और युवा झेल रहे हैं।
सत्ता का केंद्रीकरण बनाम विकेंद्रीकरण
राहुल गांधी ने BJP, RSS और कांग्रेस के बीच वैचारिक अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि जहां BJP सत्ता को दिल्ली में केंद्रित रखना चाहती है, वहीं कांग्रेस सत्ता को गांव, पंचायत और स्थानीय निकायों तक पहुंचाने की पक्षधर है।उन्होंने कहा,अगर आप गहराई से देखें तो साफ दिखाई देगा कि वे सत्ता का केंद्रीकरण चाहते हैं और हम सत्ता का विकेंद्रीकरण। लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब निर्णय जनता के सबसे नजदीक लिए जाएं।”
‘पंचायतों को आर्थिक अधिकार देने से बच रही है BJP’
राहुल गांधी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि BJP पंचायतों और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को वित्तीय अधिकार देने से जानबूझकर बच रही है। उनका कहना था कि केंद्र सरकार चाहती है कि सभी अहम फैसले और संसाधन दिल्ली के हाथ में ही रहें।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब तक पंचायतों को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार नहीं मिलेंगे, तब तक जमीनी स्तर पर विकास संभव नहीं है।
बेरोजगारी पर UDF को दी सलाह
केरल की राजनीति के संदर्भ में राहुल गांधी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन को बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों पर प्राथमिकता के साथ काम करना चाहिए और आम जनता के लिए सुलभ रहना चाहिए।उनका कहना था कि युवा वर्ग आज सबसे ज्यादा हताश है और उसे केवल भाषण नहीं, बल्कि ठोस समाधान चाहिए।

महान राष्ट्र चुप्पी से नहीं बनते
राहुल गांधी ने अपने भाषण में देश में बढ़ती “चुप्पी की संस्कृति” पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज देश में बहुत से लोग सच्चाई जानते हैं, लेकिन डर या स्वार्थ के कारण उसे खुलकर कहने का साहस नहीं कर पाते।
उन्होंने कहा,महान देश और महान लोग चुप रहकर नहीं बनते। वे तब बनते हैं, जब लोग अपनी बात कहते हैं, अपने विचार व्यक्त करते हैं और उनके लिए संघर्ष करते हैं।”
राहुल गांधी ने इस चुप्पी को “लालच की संस्कृति” से भी जोड़ा, जिसमें लोग यह सोचते हैं कि जब तक वे खुद सुरक्षित हैं, तब तक समाज में हो रही हिंसा, अपमान और अन्याय से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
चुनावी माहौल में बयान का महत्व
गौरतलब है कि इस साल केरल में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में भी चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में राहुल गांधी के ये बयान न केवल केरल, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम माने जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह भाषण कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह लोकतंत्र, विकेंद्रीकरण और कॉरपोरेट-सरकार गठजोड़ जैसे मुद्दों को केंद्र में लाकर BJP को घेरने की कोशिश कर रही है।




