कांग्रेस नेता राहुल गांधी हाल के दिनों में लगातार बड़े वादों की वजह से सुर्खियों में हैं। रायबरेली में उनका “₹1 लाख खटक-खटक आएगा” वाला बयान चर्चा में रहा। बिहार की रैलियों में उन्होंने “मैं बहन मान योजना” और अग्निवीर योजना में बदलाव का वादा कर नया सियासी नैरेटिव खड़ा किया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये वादे ज़मीनी तौर पर पूरे हो पाएंगे?
रायबरेली में किया था ₹1 लाख ‘खटक-खटक’ का वादा
2024 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने रायबरेली की एक रैली में कहा था:
“जीतने के बाद गरीब परिवारों के खाते में ₹1 लाख खटक-खटक आता रहेगा। गरीबी एक झटके में मिटा देंगे।”
- राहुल गांधी रायबरेली से चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन अब तक इस योजना पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
- कई मतदाताओं का कहना है कि इस बयान से उन्हें उम्मीद बंधी थी, लेकिन वादे पर अमल होता नहीं दिख रहा।
- विपक्ष इसको लेकर कांग्रेस पर पहले से ही हमला बोल रहा है और इसे “जुमला 2.0” बता रहा है।
बिहार में नया दांव – ‘माँ बहन मान योजना’
हाल ही में बिहार में रैली करते हुए राहुल गांधी ने एक नई योजना का ऐलान किया। इसका नाम है – “माँ बहन मान योजना”।
- इस योजना के तहत कांग्रेस ने वादा किया है कि अगर उनकी सरकार बनी तो हर महिला को ₹2,500 मासिक आर्थिक सहायता दी जाएगी।
- राहुल गांधी ने कहा कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास होगी।
चुनावी रणनीति:
- राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह योजना महिलाओं के वोट बैंक को साधने की कोशिश है।
- बिहार में महिला मतदाता संख्या काफी अधिक है और ग्रामीण इलाकों में सीधे कैश ट्रांसफर का असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।
आर्थिक सवाल:
- लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या राज्य सरकार हर महीने इतनी बड़ी रकम का प्रबंध कर पाएगी?
- अनुमान है कि अगर दो करोड़ महिलाएं इसमें शामिल होती हैं, तो सरकार को हर महीने ₹50,000 करोड़ से ज़्यादा खर्च करने होंगे।
- फिलहाल कोई वित्तीय रोडमैप सामने नहीं आया है।
अग्निवीर योजना में बदलाव का वाद
बिहार में ही राहुल गांधी ने एक और बड़ा वादा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आने पर अग्निवीर योजना में बदलाव करेगी।
- गौरतलब है कि अग्निवीर योजना केंद्र सरकार के अधीन है और इसमें राज्य सरकार का कोई रोल नहीं है।
- राहुल गांधी ने बिहार में ही यह वादा क्यों किया?
इसका जवाब बिहार के हालात में छुपा है:
- 2022 में जब अग्निपथ योजना लॉन्च हुई थी, तब सबसे ज़्यादा और हिंसक विरोध बिहार में हुआ था।
- रेलवे स्टेशन जलाए गए, ट्रेनों को नुकसान पहुंचाया गया और हज़ारों युवाओं ने प्रदर्शन किया।
- कारण साफ था – बिहार में युवाओं का बड़ा वर्ग सेना भर्ती पर निर्भर रहता है।
- 4 साल की नौकरी और पेंशन न मिलने से उनकी उम्मीदें टूटीं।
राहुल गांधी ने इसी गुस्से को टारगेट कर चुनावी वादा किया है।
जनता के सवाल
राहुल गांधी के ये तीन बड़े वादे —
- रायबरेली का ₹1 लाख खटक-खटक, (जो पूरा नहीं हुआ)
- बिहार की ‘माँ बहन मान योजना’,
- अग्निवीर बदलाव का वादा —
सीधे तौर पर गरीबों, महिलाओं और युवाओं को टारगेट करते हैं।
- कांग्रेस इसे अपनी नई “गरीब-हितैषी” राजनीति बता रही है।
- वहीं विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है कि आखिर इतनी बड़ी योजनाओं के लिए पैसा कहां से आएगा?
- जनता के बीच भी अब यह सवाल है कि “क्या ये वादे हकीकत में बदलेंगे या सिर्फ चुनावी जुमले साबित होंगे?”
राहुल गांधी के हालिया वादों ने बिहार और यूपी की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा की है।
लेकिन जब तक इनके पीछे ठोस वित्तीय और नीतिगत खाका सामने नहीं आता, तब तक ये बयान जनता के बीच उम्मीद और शक – दोनों का मिश्रण बने रहेंगे।




