8th Pay Commission: केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा लगातार तेज हो रही है। सबसे ज्यादा उत्सुकता जिस बात को लेकर देखी जा रही है, वह है संभावित एरियर (Arrears)। अनुमान लगाया जा रहा है कि नए वेतनमान लागू होने के बाद कर्मचारियों को अच्छी-खासी रकम एरियर के रूप में मिल सकती है। हालांकि यह साफ कर देना जरूरी है कि अभी तक सरकार की ओर से कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है और फिलहाल जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे सिर्फ संभावित गणनाओं पर आधारित हैं।
जानकारी के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू मानी जा रही हैं। ऐसे में यदि नए वेतनमान लागू होने में देरी होती है, तो कर्मचारियों को उस अवधि का बकाया एरियर के रूप में मिल सकता है। यही वजह है कि कर्मचारी और पेंशनर्स इस मुद्दे पर खास नजर बनाए हुए हैं। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, लेवल 1 से लेवल 5 तक के कर्मचारियों को फिटमेंट फैक्टर के आधार पर लगभग 3 लाख रुपये से लेकर 9 लाख रुपये से अधिक तक का एरियर मिल सकता है। लेकिन यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार आखिरकार कौन-सा फिटमेंट फैक्टर तय करती है और वेतन संशोधन लागू होने में कितना समय लगता है।
दरअसल, एरियर की गणना का आधार नया बेसिक पे और महंगाई भत्ता (DA) होता है। जब नया वेतनमान पिछली तारीख से लागू किया जाता है, तो पुराने और नए वेतन के बीच का अंतर जमा होकर एरियर बनता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी की सैलरी में संशोधन 20 महीने बाद लागू होता है, तो उन 20 महीनों का अंतर जोड़कर एरियर तय किया जाता है। इसी प्रक्रिया में फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि वही तय करता है कि बेसिक पे में कितना बढ़ोतरी होगी।
फिटमेंट फैक्टर को आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसा मल्टीप्लायर है, जिसके जरिए पुराने बेसिक पे को नए वेतनमान में बदला जाता है। अलग-अलग संभावित फैक्टर जैसे 2.0, 2.15, 2.28 और 2.57 के आधार पर अनुमान लगाए गए हैं। यदि फिटमेंट फैक्टर कम रहता है, तो एरियर की राशि भी कम होगी, जबकि ज्यादा फैक्टर का मतलब है ज्यादा भुगतान। उदाहरण के तौर पर, लेवल 1 के कर्मचारी को 20 महीनों की देरी की स्थिति में लगभग 3.60 लाख रुपये से लेकर 5.65 लाख रुपये तक एरियर मिल सकता है। वहीं लेवल 5 कर्मचारियों के लिए यह रकम करीब 5.84 लाख से बढ़कर 9.17 लाख रुपये से ज्यादा तक जा सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इन अनुमानों को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए। पिछले वेतन आयोगों के अनुभव को देखें तो अक्सर लागू होने की तारीख और वास्तविक भुगतान के बीच समय का अंतर रहा है। इसी दौरान एरियर तैयार होता है और बाद में एकमुश्त राशि के तौर पर दिया जाता है। लेकिन यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि आमतौर पर एरियर में सिर्फ बेसिक पे और डीए का अंतर शामिल होता है। कई बार हाउस रेंट अलाउंस (HRA) या ट्रांसपोर्ट अलाउंस जैसे अन्य भत्ते पूरी तरह शामिल नहीं किए जाते, इसलिए वास्तविक भुगतान अनुमान से अलग हो सकता है।
कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच इस समय उम्मीद का माहौल जरूर है, लेकिन साथ ही धैर्य रखना भी जरूरी है। सरकार द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फिटमेंट फैक्टर क्या रहेगा, वेतन वृद्धि कितनी होगी और एरियर का अंतिम आकार कितना बनेगा। कई बार नीति स्तर पर बदलाव भी किए जाते हैं, जिससे शुरुआती अनुमान बदल जाते हैं। इसलिए सिर्फ वायरल आंकड़ों या अपुष्ट खबरों के आधार पर उम्मीदें तय करना सही नहीं माना जा रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, अगर एरियर का भुगतान बड़ा होता है तो इससे कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ सकती है, जिसका असर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। वेतन वृद्धि से उपभोग बढ़ता है और इससे अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है। हालांकि सरकार के लिए यह वित्तीय संतुलन का मामला भी होता है, इसलिए हर निर्णय कई स्तरों पर समीक्षा के बाद लिया जाता है।
फिलहाल यही कहा जा सकता है कि 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं जरूर तेज हैं, लेकिन अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है। कर्मचारियों को सलाह दी जा रही है कि वे सिर्फ आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करें और सरकार की घोषणा का इंतजार करें। जैसे ही फिटमेंट फैक्टर और लागू होने की तारीख तय होगी, तभी वास्तविक एरियर और सैलरी संशोधन की पूरी जानकारी सामने आएगी। तब तक यह पूरा मामला संभावनाओं और अनुमानित गणनाओं के दायरे में ही बना रहेगा।





