नई दिल्ली: देश के करोड़ों केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स 1 फरवरी 2026 को पेश हुए केंद्रीय बजट से बड़ी उम्मीद लगाए बैठे थे। खास तौर पर सभी की निगाहें 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर टिकी थीं। लेकिन बजट भाषण और दस्तावेज़ों का गहराई से अध्ययन करने के बाद यह साफ हो गया कि सरकार ने 8वें वेतन आयोग को लेकर किसी भी तरह की घोषणा से परहेज़ किया है।बजट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार ने जानबूझकर इस मुद्दे को टाल दिया है, या फिर 8वां वेतन आयोग अभी प्राथमिकता सूची में नहीं है।
बजट में क्या शामिल रहा
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में:
- आर्थिक विकास
- टैक्स ढांचे में सुधार
- बुनियादी ढांचे पर निवेश
- डिजिटल और हरित अर्थव्यवस्था
- सामाजिक कल्याण योजनाओं
जैसे कई अहम विषयों पर विस्तार से बात की।हालांकि, वेतन संशोधन, वेतन आयोग या कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी जैसे विषयों पर कोई उल्लेख नहीं किया गया।बजट के विस्तृत दस्तावेज़ों में भी 8वें वेतन आयोग से जुड़े किसी अतिरिक्त खर्च या संभावित प्रावधान का ज़िक्र नहीं मिलता।
कर्मचारियों को उम्मीद क्यों थी
केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें इसलिए भी ज़्यादा थीं क्योंकि:
- 7वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2016 से लागू हुआ था
- लगभग 10 वर्षों का कार्यकाल पूरा होने की ओर है
- महंगाई दर में बीते वर्षों में लगातार वृद्धि हुई है
- केवल महंगाई भत्ता (DA) बढ़ने से वास्तविक आय में संतुलन नहीं बन पा रहा
कर्मचारी संगठनों का मानना था कि सरकार कम से कम 8वें वेतन आयोग के गठन को लेकर संकेत देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
क्या 8वें वेतन आयोग में देरी के संकेत हैं
विशेषज्ञों के अनुसार, वेतन आयोग की प्रक्रिया लंबी और चरणबद्ध होती है।
आमतौर पर:
- आयोग के गठन से लेकर
- रिपोर्ट तैयार होने तक
- और फिर सिफारिशें लागू होने तक
करीब 16 से 18 महीने का समय लग जाता है।
यदि 2026 में इसकी औपचारिक घोषणा नहीं होती है, तो यह संभावना बनती है कि नई वेतन संरचना 2027 या 2028 से पहले लागू न हो पाए।यह स्थिति उन कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय है, जो लंबे समय से वेतन संशोधन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
सरकार की चुप्पी के पीछे संभावित कारण
हालांकि सरकार की ओर से कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है, लेकिन बजट संकेतों से कुछ बातें समझी जा सकती हैं:
- सरकार फिलहाल राजकोषीय अनुशासन पर ज़ोर दे रही है
- बड़े वेतन संशोधन से सरकारी खर्च में भारी बढ़ोतरी होती है
- सरकार आर्थिक स्थिरता और पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दे रही है
विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार फिलहाल परिस्थितियों का आकलन कर रही है और किसी भी बड़े निर्णय से पहले संतुलन बनाए रखना चाहती है।

कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रिया
बजट के बाद कई कर्मचारी संगठनों ने निराशा व्यक्त की है।
उनका कहना है कि:
- केवल महंगाई भत्ता बढ़ाना स्थायी समाधान नहीं है
- बेसिक सैलरी में संशोधन ज़रूरी है
- सरकार को स्पष्टता दिखानी चाहिए, ताकि कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति न बने
कई संगठनों ने मांग की है कि सरकार जल्द ही 8वें वेतन आयोग को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करे।क्या 8वां वेतन आयोग रद्द हो गया है
इस सवाल पर विशेषज्ञों का कहना है कि:
- 8वें वेतन आयोग को रद्द मानना जल्दबाज़ी होगी
- सरकार ने न तो इसे खारिज किया है और न ही इसकी पुष्टि की है
- फिलहाल यह विषय निर्णय प्रक्रिया में प्रतीत होता है
इसका अर्थ यह है कि भविष्य में इस पर फैसला लिया जा सकता है, लेकिन फिलहाल कोई समयसीमा तय नहीं है।
आगे क्या हो सकता है
आने वाले महीनों में:
- कर्मचारी संगठनों का दबाव बढ़ सकता है
- संसद में इस मुद्दे पर सवाल उठ सकते हैं
- सरकार किसी बयान या समिति के माध्यम से स्थिति साफ कर सकती है
फिलहाल, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को सरकार के अगले कदम का इंतज़ार करना होगा।





