मालदीव ने भारत से लिए गए कर्ज की दूसरी किश्त का भुगतान कर दिया है. राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने घोषणा की कि उनकी सरकार ने 50 मिलियन डॉलर के दूसरे ट्रेजरी बिल का पूरा भुगतान कर दिया है.
भारत और Maldives के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने मालदीव को कई तरह की वित्तीय सहायता, कर्ज और विशेष आर्थिक सुविधाएँ प्रदान की हैं। इनमें Line of Credit, Currency Swap, Treasury Bills और विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए सहायता शामिल है।
हाल के वर्षों में दिए गए बड़े आर्थिक पैकेजों पर नजर डालें तो जुलाई 2025 में भारत ने मालदीव को लगभग 565 मिलियन डॉलर (करीब ₹4,850 करोड़) की नई Line of Credit प्रदान की। इस सहायता का उद्देश्य मालदीव में विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना था।
इसके अलावा अक्टूबर 2024 में भारत ने मालदीव को 400 मिलियन डॉलर की Currency Swap सुविधा उपलब्ध कराई थी। साथ ही करीब ₹3,000 करोड़ की अतिरिक्त swap line भी दी गई। इस कदम से मालदीव को विदेशी मुद्रा संकट और आर्थिक दबाव से राहत मिलने में मदद मिली।भारत पहले से ही मालदीव में कई बड़े विकास कार्यों में सहयोग करता रहा है। इनमें हाउसिंग प्रोजेक्ट, सड़क निर्माण, बंदरगाह विकास, पुल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ शामिल हैं। इन योजनाओं के लिए भारत ने कर्ज और आर्थिक सहायता दोनों उपलब्ध कराई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत द्वारा दी गई सहायता का बड़ा हिस्सा “Line of Credit” के रूप में होता है। इसका मतलब यह है कि पूरी राशि सीधे नकद के तौर पर नहीं दी जाती, बल्कि इसका उपयोग आमतौर पर भारतीय कंपनियों के माध्यम से परियोजनाओं को पूरा कराने में किया जाता है। इससे दोनों देशों को आर्थिक लाभ मिलता है और परियोजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता बनी रहती है।
साल 2025 में भारत ने मालदीव के पुराने कर्ज की repayment शर्तों को भी आसान बनाया था, जिससे मालदीव को अपने वित्तीय प्रबंधन में राहत मिली।भारत की यह आर्थिक सहायता केवल वित्तीय सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों के मजबूत रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को भी दर्शाती है।











