RBI MPC Meeting 2026: क्या Repo Rate बदलेगा या रहेगा स्थिर?

RBI MPC : भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) बैठक शुरू हो चुकी है। इस बैठक का समापन 8 अप्रैल को होगा, जब गवर्नर संजय मल्होत्रा Repo Rate सहित अन्य नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है-क्या इस बार RBI ब्याज दरों में बदलाव करेगा या मौजूदा स्थिति को बरकरार रखेगा?

फिलहाल संकेत यह बताते हैं कि RBI किसी जल्दबाज़ी में नहीं है। SBI Research और Kotak Mutual Fund जैसे संस्थानों का मानना है कि इस बार केंद्रीय बैंक Repo Rate में कोई बदलाव नहीं करेगा और इसे 5.25% पर ही बनाए रखेगा। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों में स्थिरता बनाए रखना ज्यादा जरूरी है।

इस बार की बैठक ऐसे समय हो रही है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता काफी बढ़ चुकी है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल आया है। मार्च की शुरुआत से अब तक कीमतों में करीब 48% की वृद्धि देखी गई है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर पड़ता है।

तेल की कीमतों में वृद्धि के साथ-साथ भारतीय रुपये पर भी दबाव बढ़ा है। डॉलर के मुकाबले रुपया 93 के स्तर के ऊपर पहुंच चुका है। पिछले कुछ महीनों में रुपये की यह गिरावट बाहरी दबावों को साफ तौर पर दर्शाती है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों का रुख भी बदला है। वित्त वर्ष 2026 में लगभग 16.6 अरब डॉलर का FII आउटफ्लो दर्ज किया गया, जो 1991 के बाद सबसे अधिक है।

महंगाई के मोर्चे पर तस्वीर थोड़ी जटिल है। हेडलाइन महंगाई भले ही 3.21% पर RBI के लक्ष्य के भीतर है, लेकिन आयातित महंगाई 5.36% तक पहुंच चुकी है। तेल की कीमतों और रुपये की कमजोरी के कारण आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव बना रह सकता है। SBI Research का अनुमान है कि अगले तीन तिमाहियों तक महंगाई 4.5% से ऊपर रह सकती है।

इसके अलावा मौसम से जुड़ा जोखिम भी सामने है। इस वर्ष सुपर एल नीनो की आशंका जताई जा रही है, जिससे मानसून प्रभावित हो सकता है और खाद्य महंगाई बढ़ सकती है। ऐसे में RBI के लिए स्थिति और जटिल हो जाती है।

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि RBI फिलहाल Repo Rate में बदलाव करने के बजाय liquidity management और वित्तीय स्थिरता पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। बाजार को स्थिर बनाए रखने और सिस्टम में संतुलन बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक अन्य उपायों पर जोर दे सकता है।

Bank of Baroda के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का मानना है कि इस बार RBI के फैसले से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका दृष्टिकोण और बयान होगा। आने वाले समय के लिए GDP और महंगाई के अनुमान पर भी बाजार की नजर रहेगी।मौजूदा वैश्विक तनाव, बढ़ती तेल कीमतें, कमजोर होता रुपया और महंगाई के संभावित दबाव को देखते हुए RBI के लिए यह समय सतर्क रहने का है। ऐसे में संभावना यही है कि इस बार Repo Rate में कोई बदलाव न किया जाए और केंद्रीय बैंक स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखे।

अब सभी की निगाहें 8 अप्रैल सुबह 10 बजे पर टिकी हैं, जब RBI गवर्नर इस बैठक के फैसलों का ऐलान करेंगे।

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Mission Aditya
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