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Bihar: मां के दूध में यूरेनियम मिलने की खबरों पर BARC का बड़ा खुलासा

On: June 21, 2026 9:40 PM
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Bihar पटना: बिहार की महिलाओं के स्तन दूध में यूरेनियम मिलने के दावों को भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) ने खारिज कर दिया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के समक्ष प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में देश की प्रमुख परमाणु अनुसंधान संस्था ने कहा है कि ऐसे दावों के समर्थन में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं और इस मामले को लेकर जनता में अनावश्यक भय पैदा हुआ है। BARC ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि बिहार में महिलाओं के स्तन दूध में यूरेनियम प्रदूषण होने या उससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के कोई निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं। संस्था के अनुसार, बिहार और पंजाब के कुछ क्षेत्रों के भूजल में यूरेनियम की मात्रा को लेकर पहले जो दावे किए गए थे, वे कुछ शोधकर्ताओं के व्यक्तिगत आकलन और सीमित अध्ययन पर आधारित थे। इन्हें व्यापक वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने स्तन दूध में यूरेनियम की मात्रा के लिए कोई अलग सुरक्षा मानक निर्धारित नहीं किया है। BARC के मुताबिक, कुछ वैज्ञानिक निष्कर्षों को सीमित संदर्भ में प्रस्तुत किए जाने और चयनात्मक रिपोर्टिंग के कारण लोगों में भ्रम और चिंता बढ़ी। संस्था ने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों को उनके पूरे संदर्भ के साथ समझना आवश्यक है, ताकि गलत धारणाएं पैदा न हों।

देश के अधिकांश जल नमूने सुरक्षित सीमा के भीतर

रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरेनियम प्राकृतिक रूप से मिट्टी और चट्टानों में पाया जाता है, इसलिए कई क्षेत्रों के भूजल में इसकी अल्प मात्रा मिलना सामान्य है। BARC के अनुसार, देशभर में जांचे गए लगभग 98 प्रतिशत सतही और भूजल नमूनों में यूरेनियम का स्तर निर्धारित सुरक्षित सीमा के भीतर पाया गया है और इससे मानव स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं है। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) द्वारा पेयजल में यूरेनियम की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तय की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत के अधिकांश भूजल नमूनों में यूरेनियम की मात्रा इस सीमा से कम है। BARC ने रिपोर्ट में उन आशंकाओं को भी खारिज किया है जिनमें भूजल में यूरेनियम की मौजूदगी को परमाणु संयंत्रों या अन्य रेडियोलॉजिकल प्रतिष्ठानों से जोड़ा जा रहा था। संस्था के अनुसार, परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (AMD) समेत विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों की जांच में पाया गया है कि कुछ क्षेत्रों में यूरेनियम की अधिक मात्रा स्थानीय भूगर्भीय संरचना के कारण है। इसका देश के किसी परमाणु ऊर्जा संयंत्र, ईंधन चक्र सुविधा या अन्य परमाणु प्रतिष्ठान से कोई संबंध नहीं है।

पानी की गुणवत्ता से जुड़ी अन्य समस्याएं सामने आईं

हालांकि रिपोर्ट में यूरेनियम को लेकर चिंता को खारिज किया गया है, लेकिन पानी की गुणवत्ता से जुड़े कुछ अन्य मुद्दों की ओर ध्यान दिलाया गया है।जांच के दौरान करीब 83 प्रतिशत नमूनों में सल्फेट, क्लोराइड, नाइट्रेट, फ्लोराइड, कुल घुलित ठोस पदार्थ (TDS), क्षारीयता और कठोरता का स्तर निर्धारित मानकों से अधिक पाया गया। BARC के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में पारंपरिक जल गुणवत्ता संबंधी समस्याएं यूरेनियम की तुलना में अधिक गंभीर चिंता का विषय हो सकती हैं। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि बिहार की महिलाओं के स्तन दूध में यूरेनियम प्रदूषण के दावों का समर्थन करने वाला कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। संस्था का कहना है कि देश के अधिकांश हिस्सों में भूजल से रेडिएशन संबंधी स्वास्थ्य जोखिम की आशंका नहीं है और लोगों को इस मामले में अनावश्यक घबराने की जरूरत नहीं है।

Saket

लेखक परिचय (Author Bio): साकेत कुमार एक उभरते हुए डिजिटल पत्रकार और लेखक हैं, जो समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं, अर्थव्यवस्था और सामाजिक मुद्दों पर विश्लेषणात्मक लेखन करते हैं। वे KhabarX Media Publication से लेखक के रूप में जुड़े हैं और अपने स्पष्ट, तथ्यात्मक तथा पाठक-हितैषी लेखन के लिए पहचाने जाते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेष रूप से दरोगा (Sub-Inspector) की तैयारी के कारण उनके लेखों में गहराई और विषय की अच्छी समझ देखने को मिलती है। वे जटिल जानकारियों को सरल और प्रभावी भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं, ताकि आम पाठक तक सही जानकारी पहुंच सके। साकेत कुमार का उद्देश्य अपने लेखों के माध्यम से जागरूकता फैलाना और एक जिम्मेदार डिजिटल पत्रकार के रूप में अपनी पहचान बनाना है।

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