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Assam Floods: सिवसागर में बाढ़ से 60 हजार लोग प्रभावित, सैकड़ों परिवार अब भी राहत शिविरों में

On: August 2, 2026 8:28 PM
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Assam Floods Sivasagar 2026

Assam में बाढ़ की स्थिति पूरी तरह सामान्य होने का नाम नहीं ले रही है। राज्य के कई जिलों में जलभराव और नदी का बढ़ता जलस्तर लोगों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल सिवसागर (Sivasagar) में हजारों लोग अब भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं। प्रशासन के अनुसार जिले के निमाजान (Nimaijan) और बेटबारी (Betbari) क्षेत्रों के सैकड़ों परिवार अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सिवसागर जिले के लगभग 160 गांवों में करीब 60 हजार लोग अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। हालांकि कुछ इलाकों में पानी का स्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन लोगों के लिए सामान्य जीवन में लौटना अभी भी आसान नहीं है।

निमाजान और बेटबारी के गांवों में सबसे ज्यादा असर

सिवसागर जिले के निमाजान और बेटबारी इलाके बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। यहां कई दिनों तक पानी घरों के अंदर घुसा रहा, जिससे लोगों को अपना सामान छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी अचानक बढ़ने के कारण उन्हें जरूरी सामान तक निकालने का समय नहीं मिला। कई परिवारों के घरों में रखा फर्नीचर, कपड़े, अनाज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और घरेलू सामान पूरी तरह बर्बाद हो गया।कई घरों की दीवारों में दरारें आ गई हैं, जबकि कुछ कच्चे मकान पूरी तरह ढह गए। ऐसे में पानी कम होने के बाद भी लोगों के सामने अपने घरों में वापस लौटने की चुनौती बनी हुई है।बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद प्रशासन ने कई इलाकों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया। बड़ी संख्या में परिवार अभी भी वहीं रह रहे हैं।राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक राहत शिविरों में रहना आसान नहीं है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है, जबकि बुजुर्गों और बीमार लोगों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ASDMA की रिपोर्ट के अनुसार सिवसागर जिले के करीब 160 गांवों में लगभग 60 हजार लोग अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं।बाढ़ के कारण कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से टूट गया था। हालांकि कुछ इलाकों में पानी कम होने के बाद आवाजाही धीरे-धीरे बहाल हो रही है, लेकिन कई ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कृषि भूमि में लंबे समय तक पानी भरा रहने से किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। धान और अन्य मौसमी फसलें प्रभावित होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है।

राज्य में अब तक 82 लोगों की मौत

असम में इस वर्ष आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक राज्य में 82 लोगों की जान जा चुकी है।इनमें सिवसागर जिला सबसे अधिक प्रभावित माना जा रहा है, जहां 42 लोगों की मौत दर्ज की गई है। लगातार बारिश, नदियों का बढ़ता जलस्तर और कई स्थानों पर जलभराव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।प्रशासन लगातार प्रभावित इलाकों की निगरानी कर रहा है और राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं।हालांकि कुछ इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन लोगों की समस्याएं अभी खत्म नहीं हुई हैंघरों में जमा कीचड़, क्षतिग्रस्त दीवारें, दूषित पेयजल स्रोत और खराब हो चुके घरेलू सामान लोगों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। कई परिवारों के पास दोबारा सामान्य जीवन शुरू करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को स्वच्छ पानी और साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दे रहा है। निमाजान क्षेत्र के कई निवासियों ने बताया कि बाढ़ ने उनके वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया। घरों में रखा लगभग पूरा सामान खराब हो गया है। कुछ परिवारों ने बताया कि अब उनके पास रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी सीमित संसाधन बचे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी कम होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती घरों की सफाई, मरम्मत और दोबारा सामान्य जीवन शुरू करना है। कई लोग सरकारी सहायता और पुनर्वास योजनाओं का इंतजार कर रहे हैं।जिला प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। राहत सामग्री वितरण, चिकित्सा सहायता और आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे पानी का स्तर कम होगा, प्रभावित परिवारों को उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाने और क्षति का आकलन करने का कार्य तेज किया जाएगा।

आगे भी बनी रहेगी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया सबसे बड़ी चुनौती होती है। प्रभावित परिवारों को आवास, आजीविका, कृषि और बुनियादी सुविधाओं की बहाली के लिए समय और संसाधनों की आवश्यकता होगी।फिलहाल सिवसागर के हजारों परिवार इस उम्मीद में हैं कि हालात जल्द सामान्य होंगे और वे अपने घरों में लौटकर फिर से नई शुरुआत कर सकेंगे।

Deepak Kumar

मेरा नाम दीपक कुमार है और मैं KhabarX में कंटेंट राइटर के रूप में जुड़ा हूँ। मेरे लिए लिखना सिर्फ खबर बताना नहीं है, बल्कि उस सच्चाई को सामने लाना है जो अक्सर दिखती नहीं, या दिखने नहीं दी जाती। मुझे ज़मीनी मुद्दों को समझना, लोगों की बात सुनना और उन्हें सरल व साफ तरीके से लिखना पसंद है। मैं कोशिश करता हूँ कि जो भी लिखूं, वो सीधा, सच्चा और लोगों से जुड़ा हुआ हो। खासकर ऐसी खबरें जिन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन जिनका असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है। KhabarX के साथ जुड़कर मेरा उद्देश्य यही है कि मैं ऐसी स्टोरीज़ लिख सकूं जो सिर्फ पढ़ी न जाएं, बल्कि समझी भी जाएं।

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