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अनुच्छेद 370 हटने के 6 साल: 5 अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में क्या-क्या बदला?

On: August 5, 2026 12:03 PM
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अनुच्छेद 370

नई दिल्ली: 5 अगस्त 2019 भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक इतिहास की उन तारीखों में शामिल है, जिसने जम्मू-कश्मीर की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था को नई दिशा दी। इसी दिन केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को प्रभावहीन करने का फैसला लिया और जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे में बदलाव किया। इसके साथ ही राज्य का पुनर्गठन करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया।अब इस फैसले को छह वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस दौरान जम्मू-कश्मीर में कई ऐसे बदलाव देखने को मिले, जो पहले या तो संभव नहीं थे या सीमित रूप से लागू थे। हालांकि, इन परिवर्तनों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों की अपनी-अपनी राय भी है। आइए जानते हैं कि 5 अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में क्या-क्या बदला।

अनुच्छेद 370 क्या था?

अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान का एक विशेष प्रावधान था, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर को अन्य राज्यों की तुलना में अलग संवैधानिक दर्जा प्राप्त था। राज्य का अपना संविधान था और कई केंद्रीय कानून स्वतः लागू नहीं होते थे। संसद के कई कानूनों को लागू करने के लिए राज्य सरकार की सहमति आवश्यक होती थी। 5 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति के आदेश और संसद की प्रक्रिया के माध्यम से इस व्यवस्था में बदलाव किया गया। इसके बाद भारतीय संविधान के अधिकांश प्रावधान जम्मू-कश्मीर में सीधे लागू हो गए।

राज्य से दो केंद्र शासित प्रदेश बने

फैसले के साथ ही जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 लागू किया गया। इसके तहत पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया—

  • जम्मू और कश्मीर
  • लद्दाख

यह बदलाव प्रशासनिक व्यवस्था में सबसे बड़े परिवर्तनों में से एक माना जाता है।

पूरे भारतीय संविधान का विस्तार

2019 के बाद भारतीय संविधान के लगभग सभी प्रावधान जम्मू-कश्मीर में लागू हो गए। इसके साथ ही सैकड़ों केंद्रीय कानूनों का दायरा भी यहां तक बढ़ा। इससे शिक्षा, श्रम, सामाजिक न्याय, भ्रष्टाचार निरोधक व्यवस्था, बाल संरक्षण और अन्य कई क्षेत्रों से जुड़े कानून सीधे लागू होने लगे। विशेष दर्जे के दौरान कुछ मामलों में महिलाओं और अन्य वर्गों के अधिकारों को लेकर लंबे समय से बहस होती रही थी। नए कानूनी ढांचे के बाद महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित कई केंद्रीय प्रावधान लागू किए गए। सरकार का कहना है कि इससे अधिकारों का दायरा और स्पष्ट हुआ।

डोमिसाइल नियम लागू हुए

अनुच्छेद 370 में बदलाव के बाद नए डोमिसाइल नियम लागू किए गए। इनके तहत निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले लोगों को जम्मू-कश्मीर का डोमिसाइल प्रमाणपत्र प्राप्त करने की व्यवस्था दी गई। यह बदलाव भी सबसे अधिक चर्चा में रहने वाले फैसलों में शामिल रहा। 2019 के बाद पंचायत चुनावों के साथ-साथ जिला विकास परिषद (DDC) के चुनाव भी कराए गए। यह पहली बार था जब DDC चुनाव आयोजित हुए। सरकार ने इसे स्थानीय स्तर पर लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

पर्यटन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। सरकार के अनुसार श्रीनगर, गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ी है। होटल, परिवहन और स्थानीय व्यापार से जुड़े लोगों को भी इसका लाभ मिला।हालांकि पर्यटन पर मौसम, सुरक्षा और अन्य परिस्थितियों का भी प्रभाव पड़ता है, इसलिए आंकड़े समय-समय पर बदलते रहते हैं।

बुनियादी ढांचे पर तेज़ी से काम

पिछले छह वर्षों में सड़क, रेल और सुरंग परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। इनमें कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं—

  • दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज चिनाब रेल ब्रिज का निर्माण पूरा हुआ और इसे रेल नेटवर्क का हिस्सा बनाया गया।
  • उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना ने कश्मीर घाटी को भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
  • ज़ोजिला टनल और ज़ेड-मोड़ टनल जैसी परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ, जिनसे हर मौसम में बेहतर संपर्क स्थापित करने का लक्ष्य है।
  • कई राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार और सड़क सुधार कार्यों को भी गति मिली।
पहलेअब
अलग संविधानभारतीय संविधान के अधिकांश प्रावधान लागू
अलग झंडाकेवल तिरंगा आधिकारिक
राज्यकेंद्र शासित प्रदेश (जम्मू-कश्मीर) और लद्दाख
कई केंद्रीय कानून लागू नहींअधिकांश केंद्रीय कानून लागू

निवेश उद्योग पर जोर

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लिए नई औद्योगिक विकास नीति लागू की। सरकार के अनुसार इस दौरान हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए और कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना और निजी निवेश को आकर्षित करना था।बीते वर्षों में मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग संस्थान और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर भी काम हुआ। AIIMS जम्मू और AIIMS कश्मीर जैसी परियोजनाओं में प्रगति हुई। इसके अलावा कई नए शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी विकसित किया गया।सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने, भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने की दिशा में भी कई पहल की गईं। इससे विभिन्न सरकारी सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान बनाने का प्रयास किया गया।मई 2023 में श्रीनगर में जी-20 पर्यटन कार्य समूह की बैठक आयोजित हुई। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण आयोजन माना गया। सरकार ने इसे जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति और पर्यटन क्षमता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर बताया।

सुरक्षा को लेकर अलग-अलग दावे

सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है और सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में मजबूत हुई है। वहीं, समय-समय पर आतंकी घटनाएं भी सामने आती रही हैं। इसलिए सुरक्षा की स्थिति को लेकर अलग-अलग पक्षों की अलग-अलग राय बनी हुई है।11 दिसंबर 2023 को सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 370 से जुड़े केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा। साथ ही चुनावी प्रक्रिया और राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में उचित समय पर कदम उठाने की बात भी कही थी। 5 अगस्त 2019 का फैसला केवल एक संवैधानिक बदलाव नहीं था, बल्कि इससे जम्मू-कश्मीर की प्रशासनिक, कानूनी और विकास संबंधी व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन देखने को मिले। छह वर्षों के दौरान बुनियादी ढांचे, पर्यटन, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल प्रशासन जैसे क्षेत्रों में कई नई पहल हुईं। वहीं दूसरी ओर, इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस आज भी जारी है। यह स्पष्ट है कि अनुच्छेद 370 में बदलाव के प्रभावों का आकलन केवल एक दृष्टिकोण से नहीं किया जा सकता। इसके परिणामों को समझने के लिए विकास, प्रशासन, सुरक्षा, लोकतंत्र और स्थानीय जनभावनाओं—सभी पहलुओं को साथ लेकर देखना आवश्यक है। आने वाले वर्षों में जम्मू-कश्मीर की दिशा और विकास इस बात पर भी निर्भर करेगा कि इन पहलों का लाभ आम नागरिकों तक किस प्रकार पहुंचता है।

KhabarX Desk

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