सुबह 5:25 बजे भागलपुर जंक्शन से रवाना होने वाली 13401 भागलपुर–पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस हजारों यात्रियों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा है। सरकारी कर्मचारी, बैंककर्मी, छात्र, मरीज, व्यापारी और रोज़ाना अप-डाउन करने वाले लोग इस ट्रेन पर भरोसा करते हैं। रेलवे के निर्धारित समय के अनुसार ट्रेन को सुबह 10:40 बजे पटना जंक्शन पहुंचना चाहिए। लेकिन नियमित यात्रियों का कहना है कि पिछले काफी समय से यह समय केवल टाइमटेबल तक ही सीमित रह गया है। कई दिनों में ट्रेन किऊल जंक्शन तक अपने निर्धारित समय के आसपास पहुंच जाती है, लेकिन इसके बाद पटना की ओर बढ़ते हुए इसकी रफ्तार लगातार प्रभावित होती है। यात्रियों का दावा है कि किऊल से पटना के बीच कई बार ट्रेन को अलग-अलग स्टेशनों या आउटर पर रोककर दूसरी ट्रेनों को पहले निकलने दिया जाता है। परिचालन कारणों से ऐसा होना रेलवे व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है, लेकिन जब यही स्थिति लगभग रोज़ देखने को मिले तो यात्रियों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।
पांच दिनों के आंकड़ों पर नज़र
1 अगस्त से 5 अगस्त 2026 के बीच KhabarX की टीम ने 13401 भागलपुर–पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस से लगातार यात्रा की और पटना जंक्शन पर ट्रेन के वास्तविक आगमन समय का रिकॉर्ड तैयार किया। इस अवधि के दौरान दर्ज आंकड़े नीचे दिए गए हैं।
| तारीख | निर्धारित आगमन (PNBE) | वास्तविक आगमन | कुल देरी |
|---|---|---|---|
| 1 अगस्त 2026 | 10:40 AM | 11:56 AM | 1 घंटा 16 मिनट |
| 2 अगस्त 2026 | 10:40 AM | 12:05 PM | 1 घंटा 25 मिनट |
| 3 अगस्त 2026 | 10:40 AM | 12:30 PM | 1 घंटा 50 मिनट |
| 4 अगस्त 2026 | 10:40 AM | 11:38 AM | 58 मिनट |
| 5 अगस्त 2026 | 10:40 AM | 11:53 AM | 1 घंटा 13 मिनट |
यात्रियों की शिकायत आखिर क्या है?
रोज़ यात्रा करने वाले कई लोगों का कहना है कि यदि किसी दिन तकनीकी खराबी, मौसम या अन्य कारणों से ट्रेन लेट हो जाए तो उसे समझा जा सकता है। लेकिन जब लगभग हर दिन एक ही सेक्शन में देरी देखने को मिले तो सवाल केवल उस दिन के संचालन का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की समीक्षा का बन जाता है।
कई यात्रियों का कहना है कि किऊल के बाद ट्रेन की गति धीमी पड़ जाती है। कुछ का अनुभव है कि विभिन्न स्टेशनों या आउटर पर कुछ-कुछ मिनट का इंतजार जोड़ते-जोड़ते पटना पहुंचते-पहुंचते कुल देरी काफी बढ़ जाती है।
सबसे अधिक असर किन पर?
इस ट्रेन से यात्रा करने वालों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनका पूरा दिन समय पर पहुंचने पर निर्भर करता है।
- सरकारी एवं निजी कर्मचारी
- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र
- अस्पताल में इलाज के लिए जाने वाले मरीज
- छोटे व्यापारी
- दैनिक अप-डाउन करने वाले यात्री
इनके लिए 30–40 मिनट की देरी सिर्फ घड़ी का समय नहीं, बल्कि नौकरी, पढ़ाई, इलाज और व्यापार पर पड़ने वाला सीधा असर है।
क्या टाइमटेबल की समीक्षा की जरूरत है?
यदि किसी ट्रेन का वास्तविक परिचालन लंबे समय से उसके निर्धारित समय से लगातार अलग चल रहा है, तो यह रेलवे के लिए समीक्षा का विषय हो सकता है।
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यस्त रेलखंड में ट्रेनों की प्राथमिकता, सिग्नलिंग, प्लेटफॉर्म उपलब्धता और ट्रैफिक घनत्व जैसी कई बातें समयपालन को प्रभावित करती हैं। ऐसे में यदि किसी ट्रेन को नियमित रूप से एक ही सेक्शन में अधिक समय गंवाना पड़ रहा है, तो उसके ट्रेन पाथ और टाइमटेबल का पुनर्मूल्यांकन उपयोगी हो सकता हैकिऊल से पटना के बीच का रेलखंड पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल के अंतर्गत आता है और यह बिहार के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में गिना जाता है। इसी मार्ग से मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनें भी गुजरती हैं। अधिक ट्रैफिक होने के कारण परिचालन प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, यदि किसी विशेष ट्रेन में लगातार देरी दर्ज हो रही है, तो यात्रियों की अपेक्षा रहती है कि उसके कारणों की समीक्षा कर व्यावहारिक समाधान खोजा जाए।
यात्रियों की मांग
नियमित यात्रियों की मांग किसी विशेष ट्रेन को प्राथमिकता देने की नहीं है। उनका कहना है कि यदि मौजूदा परिचालन व्यवस्था में 10:40 बजे पटना पहुंचना व्यवहारिक नहीं है, तो रेलवे वास्तविक स्थिति के अनुसार टाइमटेबल की समीक्षा करे। वहीं यदि समय पर पहुंचाना संभव है, तो किऊल–पटना सेक्शन में होने वाली नियमित देरी के कारणों का विश्लेषण कर आवश्यक सुधार किए जाएं।यह रिपोर्ट किसी अधिकारी, स्टेशन या विभाग पर आरोप लगाने के उद्देश्य से नहीं लिखी गई है। इसका उद्देश्य केवल उन हजारों यात्रियों की आवाज़ को सामने लाना है जो प्रतिदिन इस ट्रेन से सफर करते हैं और समयपालन को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।यदि रेलवे प्रशासन इस ट्रेन के समयपालन के आंकड़ों का विश्लेषण कर आवश्यक कदम उठाता है, तो इसका सीधा लाभ बिहार के हजारों यात्रियों को मिलेगा।


अस्वीकरण: इस रिपोर्ट में शामिल यात्रा संबंधी आंकड़े 1–5 अगस्त 2026 के दौरान KhabarX के ऑन-ग्राउंड अवलोकन पर आधारित हैं। स्टेशन-वार औसत देरी के आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ट्रेन रनिंग डेटा से संकलित किए गए हैं। रिपोर्ट का उद्देश्य जनहित में तथ्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।









