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8th Pay Commission: एरियर को लेकर बढ़ी हलचल, कर्मचारियों की सैलरी से पेंशन तक क्या बदल सकता है?

On: August 16, 2026 11:31 AM
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नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स का इंतजार अब लंबा होता जा रहा है। आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और कर्मचारी संगठन अपनी-अपनी मांगें भी सामने रख रहे हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि नई सैलरी कितनी बढ़ेगी और अगर वेतन आयोग लागू होने में समय लगा तो कर्मचारियों को एरियर कितना मिलेगा। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा भी खूब चल रहा है। इसमें कहा जा रहा है कि अगर 8वें वेतन आयोग को लागू करने में देरी हुई तो सरकार कर्मचारियों के एरियर में कटौती कर सकती है। हालांकि, अभी तक केंद्र सरकार की ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है। इसलिए इस दावे को फिलहाल आधिकारिक फैसला मानना सही नहीं होगा।दूसरी तरफ कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर नई वेतन व्यवस्था की प्रभावी तारीख 1 जनवरी 2026 रखी जाती है, तो कर्मचारियों को उस तारीख से मिलने वाला पूरा अंतर यानी एरियर दिया जाना चाहिए। वेतन आयोग के मामले में 1 जनवरी की तारीख काफी अहम मानी जाती है। 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें भी 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुई थीं, जबकि संशोधित वेतन का वास्तविक भुगतान बाद में शुरू हुआ था। इस वजह से कर्मचारियों को उस अवधि का एरियर मिला था।8वें वेतन आयोग को लेकर भी 1 जनवरी 2026 को प्रभावी तारीख के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। प्रभावी तारीख और खाते में नई सैलरी आने की तारीख एक जैसी होना जरूरी नहीं है। आयोग को अपनी सिफारिशें देनी होंगी। इसके बाद केंद्र सरकार उन सिफारिशों पर फैसला करेगी। सरकार की मंजूरी और जरूरी आदेश जारी होने के बाद ही संशोधित वेतन का भुगतान शुरू होगा।अगर सरकार 1 जनवरी 2026 से नई व्यवस्था को प्रभावी मानती है, तो भुगतान शुरू होने तक की अवधि का अंतर एरियर के रूप में मिल सकता है।

NFIR ने भी उठाया एरियर का मुद्दा

एरियर को लेकर कर्मचारी संगठन अपनी आवाज उठा रहे हैं। नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) की ओर से भी कहा गया है कि वेतन आयोग लागू होने में देरी का नुकसान कर्मचारियों को नहीं होना चाहिए।NFIR के वर्किंग प्रेसिडेंट बीसी शर्मा ने कर्मचारियों को प्रभावी तारीख से पूरा एरियर दिए जाने की मांग रखी है। उनका कहना है कि आयोग की प्रक्रिया में देरी का असर कर्मचारियों की जेब पर नहीं पड़ना चाहिए। हालांकि, यह कर्मचारी संगठन की मांग है। एरियर की अंतिम तारीख और उसकी गणना को लेकर फैसला केंद्र सरकार के आधिकारिक आदेश से ही साफ होगा।

फिटमेंट फैक्टर पर सबसे ज्यादा नजर

8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की सबसे बड़ी उम्मीद फिटमेंट फैक्टर को लेकर है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था। अब कर्मचारी संगठनों का एक वर्ग इसे काफी बढ़ाने की मांग कर रहा है।कई मांगों में 3.83 या 3.833 फिटमेंट फैक्टर का आंकड़ा सामने आया है।फिटमेंट फैक्टर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी के आधार पर मौजूदा बेसिक पे को संशोधित करने का फॉर्मूला तय होता है। अगर फिटमेंट फैक्टर ज्यादा होता है तो बेसिक सैलरी में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।लेकिन अभी 3.83 को अंतिम आंकड़ा मानना ठीक नहीं होगा। यह कर्मचारी संगठनों की मांग है, सरकार की मंजूर दर नहीं।

न्यूनतम बेसिक पे ₹69 हजार करने की मांग

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 7वें वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 तय किया गया था। अब 8वें वेतन आयोग के सामने न्यूनतम वेतन को काफी बढ़ाने की मांग रखी जा रही है।कर्मचारी संगठनों की कुछ मांगों में न्यूनतम बेसिक पे को ₹69,000 प्रति माह करने की बात कही गई है।अगर यह मांग स्वीकार होती है तो सबसे निचले वेतन स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा बदलाव हो सकता है। लेकिन फिलहाल ₹69,000 भी कोई तय सरकारी आंकड़ा नहीं है।

8th Pay Commission
8th Pay Commission

सालाना इंक्रीमेंट 3 से बढ़ाकर 6 फीसदी करने की मांग

कर्मचारियों की मांग सिर्फ बेसिक पे तक सीमित नहीं है। सालाना increment को लेकर भी बदलाव की मांग की जा रही है। मौजूदा व्यवस्था में सामान्य वार्षिक increment 3 फीसदी है। कर्मचारी संगठन इसे बढ़ाकर 6 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं।इसका सीधा असर कर्मचारियों की हर साल बढ़ने वाली बेसिक सैलरी पर पड़ेगा। हालांकि, इस मांग पर भी अंतिम फैसला वेतन आयोग की सिफारिश और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।

HRA में भी बदलाव की उम्मीद

मकान किराया भत्ता यानी HRA भी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है। 7वें वेतन आयोग के बाद HRA को शहर की श्रेणी और बेसिक पे के आधार पर तय किया गया था।अब कर्मचारी संगठन HRA में भी सुधार की मांग कर रहे हैं। कुछ मांगों में न्यूनतम HRA को 30 फीसदी तक करने की बात कही गई है।अगर HRA की दरों में बदलाव होता है तो कर्मचारियों की कुल मासिक सैलरी पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

पेंशनर्स को भी है बड़ी उम्मीद

8वें वेतन आयोग का असर सिर्फ नौकरी कर रहे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। केंद्रीय पेंशनर्स भी इसकी सिफारिशों पर नजर लगाए हुए हैं।पेंशन में संशोधन, न्यूनतम पेंशन बढ़ाने और फैमिली पेंशन में सुधार की मांग लंबे समय से की जाती रही है।कुछ कर्मचारी संगठनों ने रिटायरमेंट पेंशन को अंतिम आहरित वेतन के 67 फीसदी तक करने और फैमिली पेंशन को 50 फीसदी करने की मांग रखी है।यह आंकड़े फिलहाल मांगों का हिस्सा हैं। इन्हें सरकार की ओर से मंजूर पेंशन व्यवस्था समझना सही नहीं होगा। पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली की मांग भी कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में है। कई संगठन चाहते हैं कि नई पेंशन व्यवस्था को खत्म करके पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू किया जाए।हालांकि OPS का मुद्दा सिर्फ वेतन बढ़ोतरी से जुड़ा नहीं है। यह पेंशन व्यवस्था से जुड़ा अलग और बड़ा नीतिगत फैसला है। इसलिए इसे 8वें वेतन आयोग की सैलरी बढ़ोतरी के साथ जोड़कर देखना सही नहीं होगा।

एरियर पर अभी क्या स्थिति है?

फिलहाल सबसे ज्यादा ध्यान इसी बात पर है कि नई वेतन व्यवस्था किस तारीख से लागू मानी जाएगी।अगर सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी करती है और संशोधित वेतन का भुगतान बाद में शुरू होता है, तो उस अवधि का अंतर एरियर के रूप में बन सकता है। लेकिन एरियर मिलेगा या नहीं, कितना मिलेगा और किस तारीख से इसकी गणना होगी—इन सवालों का अंतिम जवाब सरकार के आधिकारिक आदेश के बाद ही मिलेगा।अभी तक एरियर काटने को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय सरकार और 8वें वेतन आयोग की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना चाहिए। फिलहाल कर्मचारियों की नजर तीन चीजों पर है—फिटमेंट फैक्टर कितना तय होता है, न्यूनतम बेसिक पे कितना बढ़ता है और 1 जनवरी 2026 से एरियर को लेकर सरकार क्या फैसला करती है।

Mission Aditya

Founder – KhabarX Building an independent media platform where facts matter more than noise. Amplifying unheard stories, questioning silence, and creating journalism powered by truth, technology, and the next generation of changemakers.

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