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बिहार: 8 महीने से जंजीरों में जकड़े पिता की दर्दनाक कहानी, दानापुर स्टेशन का वीडियो देख लोग हुए भावुक

On: May 22, 2026 10:52 AM
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Bihar के Danapur रेलवे स्टेशन से इंसानियत को झकझोर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है। स्टेशन पर एक बुज़ुर्ग व्यक्ति को पैरों में लोहे की बेड़ियाँ और ताले लगाए हुए देखा गया। यह दृश्य देखकर वहाँ मौजूद लोग हैरान और भावुक हो गए। जानकारी के अनुसार, बुज़ुर्ग को उनके ही बेटों ने पिछले करीब आठ महीनों से जंजीरों में बांध रखा है।
बताया जा रहा है कि जंजीरों में जकड़े इस बुज़ुर्ग का नाम जितेंद्र ताती है, जो Jamui ज़िले के खैरा थाना क्षेत्र के अमारी गाँव के रहने वाले हैं। परिवार का कहना है कि उनकी मानसिक स्थिति लंबे समय से ठीक नहीं है। जब उनकी हालत बिगड़ती है, तो वे आसपास के लोगों से झगड़ा करने लगते हैं और खुद को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसी डर और मजबूरी के कारण परिवार ने उन्हें बेड़ियों में बांधकर रखने का फैसला लिया।

दानापुर स्टेशन पर जब लोगों ने बुज़ुर्ग को जंजीरें घसीटते हुए चलते देखा, तो कई लोगों की आँखें नम हो गईं। बुज़ुर्ग के पैरों में मोटी लोहे की चेन और ताले लगे हुए थे। खुद जितेंद्र ताती ने बताया कि पहले उनके पैरों में पाँच ताले लगाए गए थे, लेकिन अब केवल दो ताले बचे हैं।इस मामले में जब उनके बेटे अभिलाष कुमार से बात की गई, तो उन्होंने परिवार की मजबूरी बयान की। उन्होंने कहा कि पिता की मानसिक हालत खराब होने पर उन्हें संभालना बेहद कठिन हो जाता है। परिवार के पास इलाज और देखभाल के पर्याप्त साधन नहीं हैं, इसलिए सुरक्षा के लिहाज़ से उन्हें बांधकर रखना पड़ा। परिवार ने यह भी बताया कि उन्होंने रिश्तेदारों और गाँव वालों से पैसे जुटाए हैं ताकि वे अपने पिता को Bageshwar Dham ले जा सकें। परिवार को उम्मीद है कि वहाँ जाकर बाबा के आशीर्वाद और धार्मिक उपचार से उनके पिता की मानसिक स्थिति में सुधार आएगा।


हालाँकि, यह घटना कई बड़े सवाल खड़े करती है। क्या मानसिक बीमारी से जूझ रहे किसी इंसान की देखभाल का यही तरीका होना चाहिए? क्या ग्रामीण इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी लोगों को ऐसे कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर रही है? दानापुर स्टेशन की यह तस्वीर समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक गंभीर चेतावनी बन गई है।

Om Shree

Om Shree KhabarX में एक young और focused contributor हैं, जो youth issues, local developments और public-interest stories को आसान भाषा में सामने लाते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का फोकस है — साफ जानकारी, verified updates और ground-level लोगों की आवाज़ को जगह देना।

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