बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना (04 मई 2026) में भागलपुर के महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु से जुड़ी गंभीर घटना की समीक्षा के बाद बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। 04 मई 2026 को करीब 1:15 बजे हुई घटना के बाद पुल के रख-रखाव और अनुरक्षण में लापरवाही की जांच की गई और प्रारंभिक जांच में जिम्मेदारी तय करते हुए एक अधिकारी को निलंबित कर दिया गया।
किस पर गिरी गाज?
- नाम: श्री साकेत कुमार रौशन
- पद: कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer)
- विभाग: राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर
आरोप:
- कर्तव्यों के प्रति लापरवाही
- उदासीनता
कार्रवाई:
- तत्काल प्रभाव से निलंबन
- नियम: Bihar Government Servant Rules, 2005 (Rule 9) के तहत
निलंबन के दौरान क्या होगा?
- मुख्यालय: अभियंता प्रमुख कार्यालय, पटना
- भुगतान: जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) Rule 10 के तहत
साकेत कुमार रौशन: पद और जिम्मेदारी
श्री रौशन उस समय
राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर के कार्यपालक अभियंता थे
उनकी जिम्मेदारी में शामिल था:
- पुल का मेंटेनेंस और मॉनिटरिंग
- समय-समय पर इंस्पेक्शन सुनिश्चित करना
- तकनीकी खामियों पर रिपोर्ट और सुधार कार्य
यानि, विक्रमशिला सेतु की ग्राउंड कंडीशन की सीधी जिम्मेदारी इसी पद पर होती है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल
सरकार ने कार्रवाई तो कर दी, लेकिन कुछ सवाल अभी भी खड़े हैं:
- क्या 2025–2026 में कोई बड़ा स्ट्रक्चरल ऑडिट हुआ था?
- अगर हुआ था, तो उसकी रिपोर्ट पब्लिक क्यों नहीं है?
- क्या सिर्फ एक अभियंता जिम्मेदार है, या सिस्टम में और भी चूक थी?
- इतने महत्वपूर्ण पुल के लिए प्रिवेंटिव मॉनिटरिंग सिस्टम क्यों नहीं दिखता?
बैकग्राउंड: पहले भी उठते रहे सवाल
- विक्रमशिला सेतु पर भारी ट्रैफिक दबाव लगातार बढ़ता रहा है
- पहले भी जॉइंट डैमेज और स्ट्रक्चरल चिंता सामने आती रही है
- इसी वजह से सरकार को नया समानांतर पुल बनाने की जरूरत पड़ी
यह सिर्फ एक निलंबन नहीं है—यह एक संकेत है कि मेंटेनेंस सिस्टम में कहीं न कहीं गंभीर कमी रही है अगर एक अधिकारी पर कार्रवाई होती है, तो सवाल यह भी है: क्या पूरी जवाबदेही तय होगी या मामला यहीं रुक जाएगा?









