VMMC successfully performs first dual kidney transplant, VMMC और सफदरजंग अस्पताल ने सफलतापूर्वक पहला डुअल किडनी ट्रांसप्लांट किया

वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल ने मंगलवार को अपना पहला 'डुअल किडनी ट्रांसप्लांट' (एक साथ दो किडनी का प्रत्यारोपण) सफलतापूर्वक पूरा किया। यह अस्पताल के किडनी ट्रांसप्लांट प्रोग्राम में एक बड़ी उपलब्धि है।

VMMC और सफदरजंग अस्पताल की डायरेक्टर डॉ. कविता शर्मा के नेतृत्व में, यह संस्थान एडवांस्ड और स्पेशलाइज़्ड हेल्थकेयर के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा है। इस मुश्किल 'डुअल किडनी ट्रांसप्लांट' का सफल समापन VMMC और सफदरजंग अस्पताल के लिए एक और अहम उपलब्धि है।

एक बयान के अनुसार, इस प्रक्रिया में मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. चारू बंबा का सहयोग मिला। उन्होंने इस जटिल और कई विभागों से जुड़े ट्रांसप्लांट के लिए ज़रूरी संस्थागत मदद और मार्गदर्शन सुनिश्चित किया।

इस प्रक्रिया की अहमियत 'मार्जिनल डोनर' (ऐसे डोनर जिनकी उम्र या स्वास्थ्य कारणों से अंग की गुणवत्ता आदर्श नहीं होती) से मिली किडनी के इस्तेमाल में है।

19 सितंबर 2026 की रात, कमांड हॉस्पिटल, चंडीमंदिर में 62 वर्षीय व्यक्ति को 'ब्रेन डेड' घोषित किया गया। उनके परिवार ने उनके अंग दान करने का साहसी फ़ैसला लिया।

हालांकि, डोनर की उम्र और अन्य मेडिकल कारणों से उन्हें 'मार्जिनल डोनर' की श्रेणी में रखा गया था।

ऐसे मामलों में, मरीज़ को सिर्फ़ एक किडनी ट्रांसप्लांट करने से ज़रूरी क्लिनिकल फ़ायदे नहीं मिल पाते हैं। साथ ही, डोनर अंगों की लगातार कमी को देखते हुए, दान किए गए हर उपयुक्त अंग का बेहतर से बेहतर इस्तेमाल करना ज़रूरी हो जाता है।

पूरी जांच-पड़ताल के बाद, सफदरजंग अस्पताल की ट्रांसप्लांट टीम ने संभावित जोखिमों और फ़ायदों का ध्यानपूर्वक विश्लेषण किया और मरीज़ के परिवार की सहमति से 'डुअल किडनी ट्रांसप्लांट' करने का फ़ैसला किया। इसमें एक ही डोनर की दोनों किडनी एक ही मरीज़ में ट्रांसप्लांट की गईं।

यह फ़ैसला उपलब्ध डोनर अंगों के इस्तेमाल के प्रति एक सोच-समझकर अपनाए गए नज़रिए को दिखाता है, खासकर तब जब किडनी ट्रांसप्लांट की ज़रूरत वाले मरीज़ों की संख्या और उपयुक्त डोनर अंगों की उपलब्धता के बीच बहुत बड़ा अंतर है।

चूंकि अंग निकालने और ट्रांसप्लांट करने का काम समय के लिहाज़ से बहुत अहम होता है, इसलिए इंडियन एयर फ़ोर्स (वेस्टर्न कमांड) ने ज़रूरी लॉजिस्टिकल मदद दी और निकाले गए अंगों को एयरलिफ़्ट करके दिल्ली पहुँचाने में सहायता की।

बयान के अनुसार, लिवर आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), नई दिल्ली को दिया गया, जबकि किडनी सफदरजंग अस्पताल भेजी गईं। यह डुअल किडनी ट्रांसप्लांटेशन, यूरोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के डायरेक्टर प्रोफेसर और हेड डॉ. पवन वासुदेवा की अगुवाई में एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम ने किया। इस टीम में डॉ. नीरज कुमार, डॉ. संदीप कुमार और डॉ. गौरव वशिष्ठ भी शामिल थे।

इस डुअल किडनी ट्रांसप्लांटेशन का सफल होना VMMC और सफदरजंग अस्पताल के किडनी ट्रांसप्लांट प्रोग्राम में एक अहम प्रगति को दर्शाता है।

अंगों की भारी कमी के इस दौर में, उपलब्ध डोनर अंगों का बेहतर इस्तेमाल करने की सोच-समझकर बनाई गई रणनीतियाँ किडनी ट्रांसप्लांट के मौकों को बढ़ा सकती हैं और उन मरीज़ों को उम्मीद दे सकती हैं जो ट्रांसप्लांट का इंतज़ार करते हुए डायलिसिस पर निर्भर हैं।

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