CBSE के नए डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम On-Screen Marking (OSM) को लेकर देशभर में विवाद बढ़ता जा रहा है। कई छात्रों ने आरोप लगाया है कि उन्हें गलत उत्तर पुस्तिकाएं दिखाई गईं, कुछ कॉपियां धुंधली थीं, पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा था और कई छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिकाएं समय पर नहीं मिल सकीं। इन आरोपों के बीच हैदराबाद स्थित कंपनी Coempt Edu Tech के CEO VSN Raju ने सामने आकर कहा है कि “पूरा सिस्टम गलत नहीं है” और सामने आए मामले बेहद सीमित हैं। The News Minute से बातचीत में VSN Raju ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो माहौल बनाया जा रहा है, वह वास्तविक स्थिति से काफी अलग है। उन्होंने कहा: ऐसा नहीं है कि पूरा सिस्टम खराब है या बहुत बड़ी संख्या में तकनीकी समस्याएं आई हैं। यह आरोप पूरी तरह गलत हैं।Raju के मुताबिक, CBSE की पूरी डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया सफलतापूर्वक चली और शिकायतें केवल “एक-दो यूनिक मामलों” तक सीमित हैं। हालांकि, X (पूर्व में Twitter) पर कई छात्रों ने स्क्रीनशॉट और पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि उन्हें किसी दूसरे छात्र की कॉपी दिखाई गई, कुछ उत्तर पुस्तिकाओं की तस्वीरें धुंधली थीं और कई बार पोर्टल खुल ही नहीं रहा था।
छात्रों को जल्द मिलेंगी उत्तर पुस्तिकाएं
VSN Raju ने कहा कि जिन्होंने भी उत्तर पुस्तिका की कॉपी के लिए आवेदन किया है, उन्हें जल्द उनकी कॉपी मिल जाएगी। उन्होंने यह भी माना कि CBSE धुंधली इमेज और अन्य तकनीकी शिकायतों की जांच कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वह छात्रों के अंकों या मूल्यांकन से जुड़ी बातों पर टिप्पणी करने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
Ethical Hacker के दावे पर कंपनी का जवाब
हाल ही में एक 19 वर्षीय Ethical Hacker ने दावा किया था कि उसने Coempt के सिस्टम में घुसकर कई सुरक्षा खामियां खोजी हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए Raju ने कहा कि CBSE के लिए इस्तेमाल होने वाला मुख्य सर्वर कभी भी हैक नहीं हुआ।
उनके अनुसार: जिस सर्वर को एक्सेस किया गया, वह सिर्फ टेस्टिंग के लिए इस्तेमाल होता था। उसमें डमी डेटा था और उसका सार्वजनिक एक्सेस था। उसका किसी क्लाइंट या CBSE के लाइव सिस्टम से कोई संबंध नहीं था।
दूसरे छात्र की कॉपी मिलने पर क्या बोली कंपनी?
सबसे चर्चित मामलों में से एक छात्र Vedant Shrivastava का था, जिसने दावा किया कि CBSE द्वारा दिखाई गई उत्तर पुस्तिका उसकी नहीं थी। इस मामले पर Coempt CEO ने कहा कि शुरुआती जांच में “मानवीय गलती” सामने आ रही है, तकनीकी गलती नहीं। उन्होंने कहा: हमने स्कैनिंग लोकेशन और संबंधित व्यक्ति की पहचान कर ली है। तकनीकी रूप से कोई त्रुटि नहीं मिली है। हालांकि, कंपनी अभी भी पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

95% छात्रों को कॉपियां दी जा चुकी हैं
Raju का दावा है कि आवेदन करने वाले लगभग 95% छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे स्कैनर इंडस्ट्री स्टैंडर्ड के हैं और उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठाना गलत है। सोशल मीडिया पर लगाए गए इस आरोप को भी उन्होंने खारिज किया कि टेंडर की शर्तें बदलकर कंपनी को फायदा पहुंचाया गया मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि CBSE ने इस बड़े डिजिटल बदलाव से पहले केवल सीमित स्तर पर ट्रायल किया था। लेकिन Coempt CEO ने इसे “पूरी तरह गलत” बताया। उनके अनुसार जनवरी 2026 से देशभर में कई Dry Runs किए गए थे, जिनमें एक दिन में लगभग 40,000 शिक्षकों ने ऑनलाइन मूल्यांकन प्रक्रिया का परीक्षण किया। हालांकि, दूसरी ओर Hindustan Times की रिपोर्ट में कहा गया कि CBSE ने जनवरी में दिल्ली के केवल पांच स्कूलों में दो दिन का सीमित परीक्षण किया था।
2019 तेलंगाना परीक्षा विवाद से भी जुड़ा है नाम
Coempt Edu Tech का नाम पहले भी विवादों में आ चुका है।
2019 में तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम विवाद में लाखों छात्रों के फेल होने और 20 से अधिक छात्रों की आत्महत्या के बाद जिस कंपनी पर सवाल उठे थे, उसका नाम Globarena Technologies था। बाद में उसी कंपनी का नाम बदलकर Coempt Edu Tech कर दिया गया। इस पर VSN Raju ने कहा: हम कुछ छिपा नहीं रहे। सभी क्लाइंट्स को नाम बदलने की जानकारी थी और मैं आज भी CEO हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि उस मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी को राहत दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में कहा था कि 3.8 लाख फेल छात्रों में केवल 1,183 मामलों में मूल्यांकन त्रुटि पाई गई थी, जो कुल का लगभग 0.16% था।
CBSE ने सार्वजनिक रूप से यह जानकारी नहीं दी थी कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली का ठेका किस कंपनी को दिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार नवंबर 2025 में जारी टेंडर में केवल दो कंपनियां — TCS और Coempt Edu Tech — तकनीकी मानकों पर खरी उतरी थीं। इसके बाद फरवरी 2026 में CBSE ने OSM सिस्टम लागू कर दिया। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस मामले पर सवाल उठाते हुए “रिजल्ट में बड़े स्तर पर छेड़छाड़” का आरोप लगाया था। CBSE ने जवाब में कहा कि पूरी टेंडर प्रक्रिया नियमों के अनुसार और पारदर्शिता के साथ पूरी की गई थी।










