नई दिल्ली: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के Terms of Reference (ToR) में 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए केंद्रीय कर्मचारियों और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन संशोधन का स्पष्ट प्रावधान शामिल करने की मांग सामने आई है। इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष एक याचिका पेश किए जाने की जानकारी सामने आई है। पेंशनर्स संगठनों की आपत्ति 8वें वेतन आयोग के मौजूदा ToR में पुराने पेंशनर्स का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने को लेकर है। उनका कहना है कि 7वें वेतन आयोग की तुलना में इस बार शब्दावली को लेकर स्थिति साफ नहीं है। इसी वजह से ToR में स्पष्टता या संशोधन की मांग की जा रही है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के Terms of Reference में कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़े मामलों पर सिफारिशें करने का दायरा तय किया गया है। पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि आयोग के ToR में पेंशन संशोधन का प्रावधान तो है, लेकिन 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। यही शब्दावली अब चर्चा का कारण बनी हुई है। पेंशनर्स संगठनों की मांग है कि सरकार इस स्थिति को स्पष्ट करे, ताकि बाद में पेंशन संशोधन को लेकर पात्रता पर विवाद की स्थिति न बने।
राष्ट्रपति के समक्ष याचिका में क्या मांग की गई?
मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष पेश की गई याचिका में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के ToR में 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन संशोधन को स्पष्ट रूप से शामिल करने की मांग की गई है। याचिका में 7वें वेतन आयोग के ToR का भी संदर्भ दिया गया है। इसमें कहा गया है कि पिछले वेतन आयोग के समय पुराने पेंशनर्स से जुड़े प्रावधान अधिक स्पष्ट थे। इसी आधार पर 8वें वेतन आयोग के ToR में भी स्पष्ट शब्दों में प्रावधान जोड़ने की मांग की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह प्रतिनिधित्व ऑल इंडिया पेंशनर्स एसोसिएशन ऑफ सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स से जुड़े लोकनाथ मिश्रा की ओर से किए जाने का उल्लेख है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के आधिकारिक Terms of Reference में पेंशन से जुड़े मामलों को आयोग के दायरे में रखा गया है। हालांकि, पेंशनर्स संगठनों की आपत्ति इस बात को लेकर है कि 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए पेंशनर्स के लिए 7वें वेतन आयोग की तरह स्पष्ट शब्दों में उल्लेख नहीं किया गया है। यही अंतर संगठन अब सरकार के सामने उठा रहे हैं। उनकी मांग किसी नए पेंशन प्रावधान की घोषणा से ज्यादा मौजूदा ToR में स्थिति को स्पष्ट करने की है।
पुराने पेंशनर्स को लेकर विवाद क्यों है?
विवाद का मुख्य कारण 1 जनवरी 2026 की तारीख है। पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि अगर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाती हैं, तो इससे पहले रिटायर हुए पेंशनर्स की पेंशन संशोधन को लेकर ToR में स्पष्टता होनी चाहिए। संगठनों की चिंता यह है कि स्पष्ट उल्लेख नहीं होने की स्थिति में बाद में अलग-अलग व्याख्या की गुंजाइश रह सकती है। इसी वजह से ToR में संशोधन या स्पष्ट शब्द जोड़ने की मांग की जा रही है। हालांकि, सिर्फ स्पष्ट उल्लेख नहीं होने के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि पुराने पेंशनर्स को 8वें वेतन आयोग के दायरे से बाहर कर दिया गया है।
डीएस नकारा मामले का क्या संदर्भ है? याचिका में सुप्रीम कोर्ट के डीएस नकारा बनाम भारत संघ मामले का भी हवाला दिया गया है। 17 दिसंबर 1982 को दिए गए इस फैसले में पेंशनर्स के एक वर्ग को केवल कटऑफ तारीख के आधार पर अलग करने से जुड़े संवैधानिक सवाल पर अदालत ने विचार किया था। यह फैसला बाद में पेंशन से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदर्भ बना। हालांकि, डीएस नकारा फैसले का अर्थ यह नहीं है कि हर नए वेतन आयोग के साथ सभी पेंशनर्स को अपने आप समान पेंशन या पूर्ण समानता मिलनी ही है। किसी मामले में इस फैसले की लागू होने की सीमा संबंधित पेंशन योजना और सरकार के फैसले पर निर्भर करती है। फिलहाल 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपी नहीं गई हैं। इसलिए पुराने पेंशनर्स को पेंशन संशोधन से बाहर किए जाने का कोई अंतिम सरकारी आदेश सामने नहीं आया है। पेंशनर्स संगठनों की मांग फिलहाल Terms of Reference में स्पष्टता लाने की है। आगे आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले से यह स्पष्ट होगा कि 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनर्स के लिए पेंशन संशोधन किस रूप में लागू होता है।

Leave a Comment