मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में बढ़ती अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार, 4 सितंबर को RBI ने दो Variable Rate Reverse Repo (VRRR) नीलामियों के जरिए बैंकिंग सिस्टम से कुल ₹6.02 लाख करोड़ की अतिरिक्त नगदी (Liquidity )निकाला हैं।।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब बैंकों के पास उपलब्ध अतिरिक्त धनराशि रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। 3 सितंबर तक बैंकिंग सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी करीब ₹10.3 लाख करोड़ थी।
आखिर RBI को इतना पैसा क्यों निकालना पड़ा?
दरअसल, हाल के दिनों में बैंकों के पास विदेशी मुद्रा से जुड़े प्रवाह और RBI की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप व्यवस्था के कारण बड़ी मात्रा में रुपये की लिक्विडिटी आई है।
ज्यादा नकदी अगर लंबे समय तक सिस्टम में बनी रहती है तो इसका असर बाजार की ब्याज दरों और महंगाई पर पड़ सकता है। इसलिए RBI अतिरिक्त पैसा वापस खींचकर बैंकिंग सिस्टम में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
VRRR क्या होता है?
VRRR यानी Variable Rate Reverse Repo RBI का एक मौद्रिक नीति उपकरण है। इसके जरिए बैंक अपनी अतिरिक्त रकम कुछ समय के लिए RBI के पास रखते हैं और बदले में उन्हें ब्याज मिलता है।
इससे बैंकिंग सिस्टम में घूम रही अतिरिक्त नकदी अस्थायी रूप से कम हो जाती है।
RBI ने कितनी रकम सोखी?
4 सितंबर को RBI ने दो अलग-अलग तीन-दिवसीय VRRR नीलामियां कीं। दोनों के जरिए कुल ₹6,02,394 करोड़ की रकम RBI के पास वापस आई। नीलामी की कट-ऑफ दर 5.24 प्रतिशत रही। इसके बावजूद सिस्टम में अतिरिक्त नकदी काफी ज्यादा बनी हुई है। इसी वजह से RBI ने 7 सितंबर को 30 दिन की VRRR नीलामी के जरिए ₹7 लाख करोड़ तक की लिक्विडिटी सोखने की योजना भी बनाई है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
फिलहाल इस कदम का सीधा मतलब यह नहीं है कि आम लोगों के बैंक खाते से पैसा निकल जाएगा। RBI जिस रकम को सोख रहा है, वह बैंकों के पास मौजूद अतिरिक्त लिक्विडिटी है।
हालांकि, अगर RBI लंबे समय तक सिस्टम में नकदी को नियंत्रित करता है तो भविष्य में बैंकिंग सेक्टर की फंडिंग और ब्याज दरों पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव आगे चलकर होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्ज की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है।
अतिरिक्त नकदी सोखने से मुद्रास्फीति (Inflation) को काबू में रखने में मदद मिलती है, जिससे आम जनता को महंगाई से राहत मिलती है।
ब्याज दरों पर भी नजर
RBI ने अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा था। अब बाजार की नजर अक्टूबर में होने वाली अगली मौद्रिक नीति बैठक पर है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा लिक्विडिटी और महंगाई की स्थिति आगे RBI के फैसलों को प्रभावित कर सकती है।

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