पटना: बिहार में शराबबंदी खत्म करने को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कहा है कि सरकार इस नीति को जारी रखेगी। 19 सितंबर को एक न्यूज शो में बातचीत के दौरान उनसे पूछा गया कि राज्य को शराब की बिक्री से करीब 30,400 करोड़ रुपये सालाना राजस्व मिलने की बात कही जाती है, ऐसे में वित्तीय दबाव के बीच शराबबंदी खत्म करने पर विचार क्यों नहीं किया जाता। जवाब में सम्राट चौधरी ने कहा कि शराबबंदी को लेकर कोई भ्रम नहीं है। उन्होंने कहा कि यह नीति जारी रहेगी और इसके उल्लंघन पर कार्रवाई भी होती रहेगी। बातचीत में बिहार में नकली शराब और शराब की तस्करी का मुद्दा भी उठाया गया।
शराबबंदी खत्म करने पर क्या बोले सम्राट चौधरी?
मुख्यमंत्री से सवाल किया गया कि शराबबंदी लागू होने के बावजूद राज्य में अवैध शराब की बिक्री और तस्करी की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे में सरकार शराबबंदी खत्म करने पर विचार क्यों नहीं करती? सम्राट चौधरी ने जवाब दिया, “शराबबंदी हर हालत में बंद रहेगा। पहला इसमें कहीं दो मत नहीं है। कोई कंफ्यूजन नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि शराबबंदी जारी रहेगी और कार्रवाई भी चलती रहेगी। यानी 19 सितंबर को दिए गए उनके बयान में शराबबंदी हटाने या शराब की बिक्री की अनुमति देने का कोई संकेत नहीं दिया गया। बातचीत में शराबबंदी के कारण राज्य के संभावित राजस्व का सवाल भी उठाया गया। सवाल में करीब 30,400 करोड़ रुपये सालाना राजस्व का आंकड़ा रखा गया और पूछा गया कि अगर यह रकम सरकार को मिल सकती है तो शराबबंदी खत्म करने पर विचार क्यों नहीं किया जाता। सम्राट चौधरी ने इसके जवाब में शराबबंदी हटाने के बजाय महिलाओं के आग्रह का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सरकार राजस्व के लिए महिलाओं के हित से समझौता नहीं करेगी।मुख्यमंत्री ने कहा, “बिहार के रेवेन्यू के चक्कर में हम महिलाओं के अस्मिता के साथ नहीं खेल सकते। यहां 30,400 करोड़ रुपये का आंकड़ा बातचीत के दौरान सवाल के रूप में सामने आया था। उपलब्ध transcript में मुख्यमंत्री की ओर से इस आंकड़े का अलग से कोई विस्तृत हिसाब नहीं दिया गया है। शराबबंदी के पीछे महिलाओं की मांग को बताते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में यह फैसला महिलाओं के आग्रह पर लिया गया था। उन्होंने 2025 में महिला समूहों के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, करीब डेढ़ लाख जगहों पर महिला समूहों से बातचीत कराई गई थी। उन्होंने दावा किया कि इन बातचीत में महिलाओं ने शराबबंदी को बिहार के लिए फैसला बताया और सरकार से इसे सख्ती से लागू कराने की मांग की। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि शराबबंदी जारी रहेगी और कार्रवाई भी चलती रहेगी।
राजस्व कहां से आएगा?
शराबबंदी खत्म करने से मिलने वाले संभावित राजस्व के सवाल के बाद मुख्यमंत्री से पूछा गया कि सरकार राज्य का राजस्व बढ़ाने के लिए किस मॉडल पर काम कर रही है। सम्राट चौधरी ने जवाब में सरकार की दूसरी योजनाओं का जिक्र किया। बातचीत में 125 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं को आर्थिक सहायता और रोजगार से जोड़ने की योजनाओं का उल्लेख हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक बिहार की एक करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना है। मुख्यमंत्री ने एक करोड़ महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने की बात भी कही। इसी बातचीत में एक करोड़ युवाओं को नौकरी देने से जुड़े सरकार के संकल्प का भी जिक्र हुआ। हालांकि, उपलब्ध बातचीत में इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जरूरी बजट, राजस्व स्रोत या विस्तृत वित्तीय योजना का विवरण नहीं दिया गया। बिहार में शराबबंदी खत्म करने का सवाल पूछे जाने पर मुख्यमंत्री का जवाब स्पष्ट रहा। सम्राट चौधरी ने कहा कि शराबबंदी जारी रहेगी। उन्होंने इसे महिलाओं की मांग से जुड़ा फैसला बताया और कहा कि राजस्व के लिए इसमें बदलाव नहीं किया जाएगा। बिहार में शराबबंदी को लेकर आगे बहस राजस्व, अवैध शराब और इसके क्रियान्वयन के मुद्दों पर हो सकती है, लेकिन 19 सितंबर के इस बयान में सरकार की ओर से शराबबंदी हटाने की कोई घोषणा नहीं की गई है।

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