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पटना वालों को अभी और करना होगा इंतजार! दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर की डेडलाइन खिसकी

दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर की डेडलाइन आगे बढ़ गई है। अब अगस्त 2027 तक इसके पूरा होने का लक्ष्य है।

 पटना से बिहटा की तरफ जाने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है। जिस दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर उम्मीद थी कि जल्द ही इस व्यस्त रास्ते पर सफर आसान होगा, उसकी समयसीमा एक बार फिर आगे बढ़ गई है। परियोजना को पहले सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसके अगस्त 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसका असर सीधे उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना दानापुर, बिहटा और आसपास के इलाकों के बीच आते-जाते हैं। इस रास्ते पर अक्सर वाहनों का दबाव रहता है और पीक आवर्स में सफर का समय भी बढ़ जाता है। ऐसे में एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे लोगों को अभी कुछ और महीने इंतजार करना होगा। दानापुर-बिहटा-कोइलवर एलिवेटेड कॉरिडोर करीब 25 किलोमीटर लंबी परियोजना है। इसका निर्माण कार्य मार्च 2024 में शुरू हुआ था। मौजूदा प्रगति के मुताबिक परियोजना का करीब 63.5 फीसदी भौतिक काम पूरा हो चुका है। यानी काम आधे से ज्यादा आगे बढ़ चुका है, लेकिन अभी भी काफी हिस्सा बाकी है। खासकर जिन जगहों पर जमीन और दूसरी निर्माण संबंधी अड़चनें हैं, वहां काम को तेजी देने की चुनौती बनी हुई है। परियोजना का निर्माण करीब 1,969 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इसका मकसद दानापुर और बिहटा के बीच आवाजाही को ज्यादा सुगम बनाना है।

जमीन की समस्या ने बढ़ाई मुश्किल

किसी बड़े सड़क प्रोजेक्ट में जमीन उपलब्ध होना सबसे अहम कड़ी होती है। दानापुर-बिहटा परियोजना में भी यही मामला निर्माण की रफ्तार पर असर डाल रहा है। बिहटा के कुछ हिस्सों में रैयती जमीन और वहां मौजूद संरचनाओं से जुड़े मामले सामने आए हैं। जब तक संबंधित जमीन निर्माण एजेंसी को पूरी तरह उपलब्ध नहीं होती, उस हिस्से में काम आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाता है। दानापुर रेलवे स्टेशन के आसपास भी जमीन और पुरानी संरचनाओं से जुड़े मुद्दों ने काम को प्रभावित किया है। परियोजना के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी अड़चनें होने की वजह से पूरे कॉरिडोर पर एक जैसी गति से निर्माण नहीं हो पाया। इस परियोजना को केवल एक एलिवेटेड सड़क के तौर पर देखना सही नहीं होगा। दानापुर से बिहटा के बीच एलिवेटेड कॉरिडोर के साथ रैंप बनाए जा रहे हैं। वहीं बिहटा से कोइलवर के बीच मौजूदा सड़क को फोरलेन करने की योजना भी इसी परियोजना का हिस्सा है। इससे दानापुर से आगे बिहटा और कोइलवर की तरफ जाने वाले वाहनों को बेहतर सड़क सुविधा मिलने की उम्मीद है।

पटना के लोगों को क्यों है इसका इंतजार?

पटना शहर लगातार फैल रहा है और पश्चिमी हिस्से में भी आबादी के साथ कारोबारी गतिविधियां बढ़ रही हैं। दानापुर-बिहटा रोड पर इसका असर साफ दिखाई देता है। सुबह और शाम के समय इस रास्ते पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद उम्मीद है कि मुख्य ट्रैफिक को अलग मार्ग मिलेगा और मौजूदा सड़क पर दबाव कुछ कम होगा। इससे यात्रा का समय घटाने और जाम की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक फायदा कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने के बाद ही पता चलेगा। बिहटा में एयरपोर्ट से जुड़ी योजनाओं और क्षेत्र के विकास को देखते हुए इस सड़क परियोजना की अहमियत और बढ़ जाती है। भविष्य में बिहटा की ओर यातायात बढ़ने की संभावना है। ऐसे में पटना से बिहटा तक तेज और बेहतर सड़क संपर्क जरूरी होगा। यही वजह है कि दानापुर-बिहटा कॉरिडोर को सिर्फ मौजूदा जाम की समस्या से जोड़कर नहीं देखा जा रहा। यह आने वाले वर्षों में पटना के पश्चिमी हिस्से की कनेक्टिविटी को बदलने वाली परियोजनाओं में शामिल हो सकता है।

पहले 2026 में पूरा होना था काम

परियोजना शुरू होने के समय इसे सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन निर्माण के दौरान सामने आई अलग-अलग दिक्कतों के कारण यह समयसीमा हासिल करना मुश्किल हो गया। अब परियोजना की संभावित पूर्णता तारीख 31 अगस्त 2027 बताई जा रही है। यानी लोगों को शुरुआती लक्ष्य की तुलना में करीब एक साल ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है। काम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अब सबसे बड़ी चुनौती बचा हुआ निर्माण समय पर पूरा करना है। इसके लिए जमीन से जुड़े मामलों को जल्द सुलझाना और निर्माण की गति बढ़ाना जरूरी होगा।

अब अगस्त 2027 पर टिकी उम्मीद

दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर पटना की यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। इसका फायदा सिर्फ दानापुर और बिहटा के बीच आने-जाने वालों को नहीं मिलेगा, बल्कि पश्चिमी पटना और आसपास के इलाकों की कनेक्टिविटी पर भी असर पड़ेगा। फिलहाल परियोजना का काम जारी है और नई समयसीमा अगस्त 2027 रखी गई है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि आने वाले महीनों में निर्माण कितनी तेजी पकड़ता है और जमीन से जुड़ी अड़चनें कितनी जल्दी दूर होती हैं। पटना के लोगों के लिए फिलहाल इतना तय है कि जिस कॉरिडोर से सफर आसान होने की उम्मीद है, उसके लिए इंतजार थोड़ा और लंबा हो गया है। अगर काम तय रफ्तार से आगे बढ़ा, तो अगले साल अगस्त तक इस परियोजना की तस्वीर काफी बदल सकती है।

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Deepak
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