बेंगलुरु में दिखेगी बिहार की संस्कृति की झलक, CM सम्राट चौधरी करेंगे ‘बिहार महोत्सव 2026’ का शुभारंभ

बिहार की समृद्ध संस्कृति, लोककला, खान-पान और गौरवशाली विरासत को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने के उद्देश्य से बेंगलुरु में बिहार महोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 3 सितंबर को इसका शुभारंभ करेंगे।

बेंगलुरु: बिहार की समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली विरासत, लोककला और पारंपरिक खान-पान की झलक अब बेंगलुरु में भी देखने को मिलेगी। ‘बिहार महोत्सव 2026’ का आयोजन 3 से 6 सितंबर तक बेंगलुरु स्थित  Art of Living International Center में किया जा रहा है। जिसे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 3 सितंबर को इस 4 दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ करेंगे।

‘एक बिहार-श्रेष्ठ बिहार’ की भावना से आयोजन

बिहार महोत्सव का उद्देश्य बिहार की सांस्कृतिक पहचान और समृद्ध विरासत को राज्य की सीमाओं से बाहर राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना है। आयोजन के जरिए बिहार की लोक परंपराओं, कला, संगीत, हस्तशिल्प, खान-पान, पर्यटन और ऐतिहासिक विरासत को बेंगलुरु के लोगों तक पहुंचाया जाएगा।महोत्सव को ‘एक बिहार-श्रेष्ठ बिहार’ की भावना से जोड़ा गया है। इसके जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले बिहार के लोगों को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ दूसरे राज्यों के लोगों को भी बिहार की विविधता से परिचित कराने की कोशिश की जा रही है।

लोकनृत्य और लोककला होंगे खास आकर्षण

बिहार महोत्सव में प्रदेश के पारंपरिक लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेंगी। कार्यक्रम में झिझिया, सामा-चकेवा, कजरी और झूमर जैसी लोक प्रस्तुतियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा बिहार की पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प को भी प्रदर्शित किया जाएगा। मधुबनी पेंटिंग, मंजूषा कला, टिकुली कला और सिक्की शिल्प जैसी लोककलाओं के माध्यम से बिहार की रचनात्मक और सांस्कृतिक विरासत को सामने रखा जाएगा।महोत्सव में बिहार के पारंपरिक खान-पान को भी विशेष जगह दी गई है। यहां आने वाले लोगों को लिट्टी-चोखा, सत्तू शरबत और सिलाव का खाजा जैसे प्रसिद्ध बिहारी व्यंजनों का स्वाद इसके पारंपरिक भोजन को भी दूसरे राज्यों के लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

बिहार की ऐतिहासिक विरासत भी होगी प्रदर्शित

बिहार सिर्फ लोककला और खान-पान के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राचीन ऐतिहासिक और शैक्षणिक विरासत के लिए भी जाना जाता है। महोत्सव में नालंदा, विक्रमशिला, पाटलिपुत्र और वैशाली जैसी ऐतिहासिक धरोहरों को भी प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही बोधगया, राजगीर और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व जैसे पर्यटन स्थलों को भी लोगों के सामने लाया जाएगा है।इससे बिहार में पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा देने और राज्य की ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे उद्घाटन

कार्यक्रम के पहले दिन यानी 3 सितंबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बेंगलुरु पहुंचकर महोत्सव का उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री शाम करीब 5:30 बजे महोत्सव स्थल पर पहुंचेंगे और स्टॉल का जायजा लेंगे। इसके बाद शाम 6 बजे से बिहार महोत्सव का भव्य उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उद्घाटन कार्यक्रम में बिहार गौरव गीत और झिझिया नृत्य की प्रस्तुति भी रखी गई है।

चार दिनों तक चलेगा सांस्कृतिक उत्सव

बिहार महोत्सव 3 से 6 सितंबर तक चलेगा। चार दिनों के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ बिहार के व्यंजन, कला, हस्तशिल्प, पर्यटन और उद्यमिता से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को प्रदर्शित किया जाएगा।कार्यक्रम में बिहार के लोक कलाकारों के अलावा अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। प्रसिद्ध लोक गायिका कल्पना पटवारी और लोक कलाकार सत्येंद्र कुमार संगीत की प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का हिस्सा हैं।

बेंगलुरु में रहने वाले बिहार के लोगों के लिए भी खास मौका

बेंगलुरु में बड़ी संख्या में बिहार के लोग रहते हैं। ऐसे में बिहार महोत्सव उनके लिए अपनी मिट्टी, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी देगा। आयोजन के माध्यम से बिहार की संस्कृति को स्थानीय लोगों और दूसरे राज्यों से आए लोगों के बीच पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कुल मिलाकर, बिहार महोत्सव 2026 बिहार की कला, संस्कृति, खान-पान, पर्यटन और ऐतिहासिक विरासत को एक बड़े मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास है। बेंगलुरु में होने वाला यह आयोजन बिहार की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने के साथ-साथ राज्य के पर्यटन और हस्तशिल्प को भी नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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Saket

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