मुंबई: साल 2020 में हुई दो मौतों ने देशभर में कई सवाल खड़े किए थे। एक तरफ अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत, दूसरी तरफ कुछ दिन पहले उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत। दोनों घटनाओं के बीच कम अंतर होने के कारण शुरुआत से ही तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। अब दिशा सालियान मामले में CBI जांच के आदेश और पोस्टमार्टम से जुड़े पुराने दावों ने इस पूरे प्रकरण को फिर सुर्खियों में ला दिया है। एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में पोस्टमार्टम टीम का हिस्सा रहे रूपकुमार शाह के हवाले से कुछ ऐसे दावे किए गए हैं, जिनमें दोनों मामलों की मेडिकल जांच को लेकर सवाल उठाए गए। दिशा के शव पर चोट के कथित निशान और सुशांत के गले पर निशान होने जैसी बातें सामने आई हैं। इन दावों ने सोशल मीडिया पर बहस जरूर छेड़ दी है, लेकिन यहां एक बात साफ समझना जरूरी है। किसी स्टिंग में किसी व्यक्ति द्वारा कही गई बात को तब तक अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता, जब तक उसकी पुष्टि मेडिकल रिकॉर्ड, फोरेंसिक रिपोर्ट या जांच एजेंसी के दस्तावेजों से न हो। स्टिंग ऑपरेशन में रूपकुमार शाह के हवाले से दिशा सालियान के पोस्टमार्टम को लेकर कई बातें कही गई हैं। दावा किया गया कि शरीर के कुछ हिस्सों पर चोट के निशान दिखाई दिए थे। रिपोर्ट में होंठ, कान और छाती समेत शरीर के कुछ हिस्सों पर कथित चोट के निशान का जिक्र किया गया है। सुशांत सिंह राजपूत के पोस्टमार्टम को लेकर भी इसी बातचीत में सवाल उठाए गए। उनके गले पर निशान होने का दावा सामने आया है। लेकिन मेडिकल जांच में किसी निशान का मतलब अपने आप हत्या साबित होना नहीं होता। चोट कैसे लगी, कब लगी, उसका स्वरूप क्या था और मौत की वजह से उसका क्या संबंध था—इन सभी सवालों का जवाब मेडिकल और फोरेंसिक जांच से मिलता है। यही कारण है कि इन दावों को फिलहाल दावे के तौर पर ही देखना उचित होगा। दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में हुई थी। वह एक ऊंची इमारत से गिर गई थीं। शुरुआती पुलिस जांच में इसे दुर्घटनावश हुई मौत के तौर पर देखा गया था। दिशा के परिवार ने बाद में जांच को लेकर सवाल उठाए। उनके पिता सतीश सालियान ने अदालत का रुख करते हुए मामले में FIR दर्ज करने और जांच की मांग की। इस मामले में 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने बाद में दिशा सालियान की मौत की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया। अब जांच एजेंसी पुराने रिकॉर्ड और मामले से जुड़े दूसरे पहलुओं को देख सकती है। इस नए घटनाक्रम के बाद पोस्टमार्टम से जुड़े पुराने बयान और दावे भी फिर चर्चा में आ गए हैं। सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को मुंबई के बांद्रा स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे। उनकी मौत के बाद मुंबई पुलिस ने जांच शुरू की थी। बाद में मामले की जांच CBI को सौंपी गई। इस मामले को लेकर देशभर में लंबे समय तक बहस चली। हत्या से लेकर साजिश तक कई तरह के दावे किए गए। सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग सिद्धांत सामने आते रहे। लेकिन मार्च 2025 में सामने आई CBI की क्लोजर रिपोर्ट के मुताबिक एजेंसी को सुशांत की मौत में आपराधिक साजिश या फाउल प्ले का सबूत नहीं मिला था। इसलिए आज सामने आने वाले किसी भी नए दावे को उस जांच के निष्कर्ष के संदर्भ में भी देखना होगा।
दोनों मौतों को एक साथ क्यों जोड़ा जाता रहा?
दिशा सालियान की मौत 8 जून को हुई और इसके छह दिन बाद सुशांत सिंह राजपूत की मौत हो गई। इतना कम अंतर होने की वजह से दोनों घटनाओं को लेकर लोगों के बीच सवाल उठने लगे। दिशा कुछ समय के लिए सुशांत से पेशेवर तौर पर जुड़ी हुई थीं। यही बात दोनों मामलों को जोड़कर देखने की चर्चाओं का एक आधार बनी। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच समय का अंतर या पेशेवर संबंध अपने आप में किसी आपराधिक कनेक्शन का सबूत नहीं है। किसी संबंध को साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य की जरूरत होती है। अब अगर नए दावों की जांच होती है तो सबसे पहले पुराने रिकॉर्ड सामने आ सकते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक रिपोर्ट, पुलिस के दस्तावेज और घटनास्थल से जुड़े रिकॉर्ड की तुलना की जा सकती है। अगर किसी व्यक्ति के बयान और आधिकारिक दस्तावेज में अंतर मिलता है तो जांच एजेंसी उस अंतर की वजह जानने की कोशिश कर सकती है। इसी तरह मेडिकल रिकॉर्ड में किसी चोट या निशान का उल्लेख है तो यह भी देखा जाएगा कि उस चोट का मौत की वजह से कोई संबंध था या नहीं। यानी सिर्फ यह कहना कि शरीर पर निशान था, जांच के लिए पर्याप्त नहीं है। उस निशान का मेडिकल अर्थ और पूरी घटना से उसका संबंध ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। वीडियोग्राफी और शव से जुड़े दावे भी चर्चा में स्टिंग ऑपरेशन में पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी और शव को कुछ समय तक रखे जाने को लेकर भी दावे सामने आए हैं। ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति जानने के लिए अस्पताल के रिकॉर्ड सबसे अहम होंगे। पोस्टमार्टम कब हुआ, किन डॉक्टरों ने किया, क्या नमूने लिए गए और उन्हें कहां भेजा गया। इन सभी बातों का रिकॉर्ड जांच में मदद कर सकता है। इसलिए केवल किसी व्यक्ति के बयान के आधार पर यह तय करना मुश्किल है कि उस समय प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई थी या नहीं।
अब CBI जांच पर टिकी नजर
दिशा सालियान मामले में CBI जांच का आदेश आने के बाद अब पुराने सवालों की दोबारा पड़ताल की संभावना है। एजेंसी के सामने यह देखना अहम होगा कि पहले की जांच में क्या-क्या सामग्री जुटाई गई थी और क्या कोई ऐसा पहलू है, जिसकी फिर से जांच की जरूरत है। अगर जांच के दौरान कोई नया और भरोसेमंद सबूत मिलता है तो उसके आधार पर आगे कार्रवाई हो सकती है। दूसरी तरफ, अगर आरोपों की पुष्टि नहीं होती तो उन्हें केवल बयान या दावा ही माना जाएगा। यही वजह है कि इस समय किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। सुशांत और दिशा से जुड़े मामलों में सोशल मीडिया ने शुरुआत से ही बड़ी भूमिका निभाई है। कई दावे वायरल हुए और उनके आधार पर अलग-अलग कहानियां भी सामने आईं। लेकिन अदालत या जांच एजेंसी के सामने सोशल मीडिया पोस्ट नहीं, बल्कि दस्तावेज और सबूत मायने रखते हैं। इसी अंतर को समझना इस मामले में सबसे जरूरी है। दिशा सालियान मामले में अब CBI जांच के बाद यह पता चल सकता है कि पुराने सवालों में से किनका कोई ठोस आधार है और किन दावों की पुष्टि नहीं होती। सुशांत सिंह राजपूत मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट पहले ही सामने आ चुकी है। इसलिए दोनों मामलों को जोड़कर कोई नया निष्कर्ष निकालने के बजाय जांच के आधिकारिक नतीजों का इंतजार करना ही उचित होगा। फिलहाल पोस्टमार्टम से जुड़े दावों ने पुरानी बहस को जरूर फिर जिंदा कर दिया है।लेकिन इस पूरे मामले में असली तस्वीर जांच, मेडिकल रिकॉर्ड और अदालत के सामने आने वाले साक्ष्यों से ही साफ होगी।

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