कश्मीर में बादल फटा: 56 की मौत, 80 लापता – मचैल माता यात्रा के बीच मची तबाही

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले के चिसोटी गांव में गुरुवार सुबह मचे भीषण बादल फटने से 56 लोगों की मौत हो गई, जबकि 80 से ज्यादा लोग लापता हैं। यह हादसा मचैल माता मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों के रास्ते पर हुआ, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

मुख्य बातें

  • तारीख और समय: गुरुवार सुबह लगभग 11:30 बजे (स्थानीय समय)
  • स्थान: चिसोटी, किश्तवाड़, जम्मू-कश्मीर
  • मृतक: कम से कम 56, संख्या बढ़ सकती है
  • लापता: लगभग 80
  • घायल: 50 गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती
  • बचाए गए: 300 से अधिक लोग

घटना का विवरण

भारी बारिश और अचानक आए तेज़ पानी ने गांव के कई घर, एक सुरक्षा चौकी और तीर्थयात्रियों के लिए बने सामुदायिक रसोईघर को बहा दिया। हादसे के समय बड़ी संख्या में यात्री भोजन कर रहे थे, जिन्हें पानी की तेज़ धारा अपने साथ ले गई।

टीवी फुटेज में डरे-सहमे तीर्थयात्रियों की चीखें और पानी का रौद्र रूप साफ दिख रहा था।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

  • ओमर अब्दुल्ला (पूर्व मुख्यमंत्री): “स्थिति बेहद गंभीर है।”
  • रामेश कुमार (डिविजनल कमिश्नर, किश्तवाड़): “सेना, वायुसेना, पुलिस और एनडीआरएफ मौके पर तैनात हैं। खोज और बचाव अभियान जारी है।”
  • पंकज कुमार शर्मा (जिला उपायुक्त, किश्तवाड़): “अभी और शव मिलने की संभावना है।”
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: “जरूरतमंदों को हर संभव मदद दी जाएगी।”

मौसम और चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, बादल फटना यानी एक घंटे में 100 मिमी से ज्यादा बारिश होना, जो पहाड़ी इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन का कारण बनती है।
स्रीनगर मौसम केंद्र ने किश्तवाड़ समेत कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है और लोगों को पुराने पेड़ों, बिजली के खंभों और जर्जर इमारतों से दूर रहने की सलाह दी है।

पिछले हफ्ते की समान त्रासदी

सिर्फ एक हफ्ते पहले उत्तराखंड में भीषण बारिश के कारण पूरा गांव मलबे में दब गया था।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और अव्यवस्थित विकास पहाड़ों में इस तरह की आपदाओं को और तेज़ और घातक बना रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने चेताया है कि बढ़ते बाढ़ और सूखे ‘भविष्य के लिए खतरे की घंटी’ हैं।

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Mission Aditya

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