भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 135 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के Certificate of Registration (CoR) रद्द कर दिए हैं। इसके अलावा 13 NBFCs ने अपना पंजीकरण स्वेच्छा से वापस कर दिया है। CoR रद्द होने के बाद संबंधित कंपनियां NBFC के रूप में वित्तीय गतिविधियां नहीं चला सकेंगी। RBI की कार्रवाई में सबसे ज्यादा कंपनियां पश्चिम बंगाल की हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक राज्य की 125 NBFCs का CoR रद्द किया गया है। इसके अलावा महाराष्ट्र की 4, दिल्ली की 2 और मध्य प्रदेश, मणिपुर, तमिलनाडु तथा तेलंगाना की एक-एक कंपनी इस कार्रवाई में शामिल है।
किन राज्यों की NBFCs पर हुई कार्रवाई?
RBI की कार्रवाई में पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य रहा। यहां 125 कंपनियों के पंजीकरण रद्द किए गए हैं।
| राज्य | CoR रद्द |
|---|---|
| पश्चिम बंगाल | 125 |
| महाराष्ट्र | 4 |
| दिल्ली | 2 |
| मध्य प्रदेश | 1 |
| मणिपुर | 1 |
| तमिलनाडु | 1 |
| तेलंगाना | 1 |
महाराष्ट्र की जिन कंपनियों का नाम सामने आया है, उनमें Essel Finance Business Loans Ltd, Toplight Tradelink Pvt Ltd और Esenpro Finance and Investment Pvt Ltd शामिल हैं। दिल्ली की Gunjan Distributors Pvt Ltd और Liberson Commodities (P) Ltd का भी CoR रद्द किया गया है। तेलंगाना की Citiwide Financial Services Ltd, मध्य प्रदेश की Kiranglobal Business Investment Ltd और मणिपुर की Uppal Credits and Investments Pvt Ltd भी सूची में हैं।
RBI ने रद्द किए Certificate of Registration?
RBI ने यह कार्रवाई RBI Act, 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित कंपनियों से जुड़े मामलों में नियामकीय शर्तों का पालन नहीं करना, लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन और NBFC गतिविधियां बंद करना जैसे कारण शामिल हैं। हर कंपनी के मामले में CoR रद्द करने का अलग कारण उपलब्ध सामग्री में नहीं दिया गया है। इसलिए सभी 135 कंपनियों पर एक ही कारण लागू होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। CoR रद्द होने के बाद संबंधित संस्थाएं NBFC के तौर पर वित्तीय कारोबार नहीं चला सकतीं।
13 कंपनियों ने खुद लौटाया पंजीकरण
RBI के मुताबिक 13 कंपनियों ने अपना Certificate of Registration स्वेच्छा से वापस किया। इनमें कुछ कंपनियां NBFC कारोबार से बाहर हो गईं, जबकि कुछ मामलों में विलय या अमलगमेशन के बाद कंपनी का अलग कानूनी अस्तित्व समाप्त हो गया। कुछ कंपनियों के स्वैच्छिक स्ट्राइक-ऑफ और Unregistered Core Investment Company (CIC) की श्रेणी में आने का भी उल्लेख है। ऐसी स्थिति में संबंधित कंपनी के लिए NBFC के रूप में RBI का CoR जरूरी नहीं रहता। स्वेच्छा से CoR लौटाने वाली कंपनियों में J Thomas Finance Pvt Ltd, Hitesha Finance and Investment Ltd, Impact Leasing Pvt Ltd, Ivory Consultants Pvt Ltd, Trishita Management Ltd और Forerunner Capital Investments Ltd के नाम शामिल हैं। जिन कंपनियों का CoR रद्द किया गया है, वे NBFC के रूप में नया वित्तीय कारोबार नहीं चला सकतीं। ऐसे में अगर किसी ग्राहक का इन संस्थाओं के साथ लोन, निवेश या किसी अन्य वित्तीय सेवा से जुड़ा संबंध है, तो उसे संबंधित कंपनी की आधिकारिक सूचना और RBI के निर्देशों को देखना चाहिए। किसी कंपनी का CoR रद्द होने का असर उसके मौजूदा ग्राहकों पर अलग-अलग तरीके से पड़ सकता है। इसलिए किसी ग्राहक के मामले में केवल CoR cancellation के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि उसका मौजूदा loan या दूसरी वित्तीय व्यवस्था अपने आप समाप्त हो गई है। RBI की कार्रवाई का सीधा असर इन कंपनियों की NBFC के रूप में काम करने की अनुमति पर है। संबंधित संस्थाओं के आगे के दायित्व और ग्राहकों से जुड़े मामलों की स्थिति कंपनी की आधिकारिक जानकारी और लागू नियमों के आधार पर देखी जानी होगी।

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