बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी परियोजना को मंजूरी मिली है। बिहार सरकार ने बक्सर से भागलपुर तक प्रस्तावित 6-लेन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी है। करीब 336 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे बिहार के पश्चिमी से पूर्वी हिस्से को जोड़ने का काम करेगा।
इस परियोजना की खास बात यह है कि एक्सप्रेसवे पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल्ड होगा। यानी निर्धारित एंट्री और एग्जिट प्वाइंट के अलावा सामान्य वाहनों के लिए सीधे एक्सप्रेसवे पर प्रवेश या उसे पार करना संभव नहीं होगा। इससे तेज और सुरक्षित आवागमन में मदद मिलने की उम्मीद है।।
336 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेसवे
बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे की प्रस्तावित लंबाई करीब 336 किलोमीटर है। इसे 6 लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जाना प्रस्तावित है।
ग्रीन फील्ड का मतलब है कि सड़क के लिए बड़े हिस्से में नया कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, न कि मौजूदा सड़क को ही चौड़ा करके पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया जाए।
परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित करने की योजना है और इसका क्रियान्वयन बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BSRDCL) के माध्यम से किया जाएगा।
किन-किन जिलों से होकर गुजरेगा रूट?
प्रस्तावित बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे 13 जिलों को जोड़ने वाला है।
रूट में ये जिले शामिल बताए गए हैं:
- बक्सर
- भोजपुर
- अरवल
- जहानाबाद
- गया
- नालंदा
- शेखपुरा
- मुंगेर
- लखीसराय
- नवादा
- जमुई
- बांका
- भागलपुर
इस तरह एक्सप्रेसवे बिहार के पश्चिमी हिस्से से शुरू होकर मध्य बिहार के कई जिलों को जोड़ते हुए भागलपुर तक पहुंचेगा।
अभी किस चरण में है परियोजना?
अभी एक्सप्रेसवे का निर्माण शुरू नहीं हुआ है।।
परियोजना को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
BSRDCL ने DPR तैयार करने के लिए कंसल्टेंसी एजेंसी और परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़ी सलाहकार सेवाओं के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद उसे संबंधित स्तरों से मंजूरी मिलेगी और उसके बाद निर्माण एजेंसी के चयन के लिए आगे की प्रक्रिया होगी।
बक्सर और भागलपुर के बीच कनेक्टिविटी होगी बेहतर
इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा उद्देश्य बिहार के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच तेज कनेक्टिविटी तैयार करना है।
बक्सर, भोजपुर और आसपास के क्षेत्रों को भागलपुर और पूर्वी बिहार के क्षेत्रों से सीधा और तेज सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है। इससे यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई करने वाले वाहनों को भी फायदा हो सकता है।
एक्सेस-कंट्रोल्ड सड़क होने के कारण ट्रैफिक को नियंत्रित तरीके से चलाने में मदद मिलेगी और लंबी दूरी के यातायात के लिए बेहतर कनेक्टिविटी विकसित हो सकती है।
उद्योग और कारोबार को मिल सकता है बढ़ावा
एक्सप्रेसवे के आसपास आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना भी बताई गई है। परियोजना से जुड़े क्षेत्रों में बड़े भूखंडों को आर्थिक गतिविधियों के लिए विकसित करने की संभावना जताई गई है।
बेहतर सड़क संपर्क मिलने से उद्योगों तक कच्चा माल पहुंचाने और तैयार सामान को बाजार तक ले जाने में समय और परिवहन लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, छोटे उद्योग और स्थानीय कारोबार के लिए भी नए अवसर पैदा होने की संभावना है। हालांकि इन आर्थिक प्रभावों का वास्तविक आकार एक्सप्रेसवे के निर्माण और उसके संचालन के बाद ही स्पष्ट होगा।
रोजगार के भी बन सकते हैं अवसर
इतनी बड़ी सड़क परियोजना के निर्माण के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
निर्माण कार्य के अलावा मशीनरी, परिवहन, सामग्री सप्लाई, होटल-रेस्टोरेंट, वेयरहाउस और अन्य सहायक सेवाओं में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
हालांकि रोजगार की वास्तविक संख्या परियोजना की अंतिम DPR, निर्माण पैकेज और कार्यान्वयन योजना सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
पहले से चल रहे दूसरे हाईवे प्रोजेक्ट्स से कैसे अलग है?
बक्सर-भागलपुर परियोजना को मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्गों की तरह केवल पुराने रास्ते को चौड़ा करने वाली परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह एक नया ग्रीन फील्ड और एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर होगा।
बिहार में इससे जुड़े दूसरे हाईवे और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स के साथ इसका कनेक्शन बनने पर राज्य के अलग-अलग हिस्सों के बीच सड़क नेटवर्क और मजबूत हो सकता है।

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