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Delhi : एयर प्यूरीफायर पर GST घटाने की मांग पर केंद्र–दिल्ली हाईकोर्ट आमने-सामने

On: December 26, 2025 6:36 PM
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दिल्ली की बिगड़ती हवा और बढ़ते प्रदूषण के बीच एयर प्यूरीफायर को लेकर एक अहम बहस दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुँच गई है। शुक्रवार को केंद्र सरकार ने एयर प्यूरीफायर पर 18% से 5% GST घटाने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) का कड़ा विरोध करते हुए इसे “संवैधानिक रूप से चिंताजनक” बताया।केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एन. वेंकटरमण ने कहा कि इस याचिका को असली जनहित याचिका नहीं माना जा सकता और इसके पीछे की मंशा भी संदेहास्पद है।

यह PIL नहीं, किसी के फायदे की कोशिश – केंद्र का आरोप

जस्टिस विकास महाजन की अध्यक्षता वाली वेकेशन बेंच के सामने ASG ने कहा,हमें नहीं पता कि इस PIL के पीछे कौन है। स्वास्थ्य मंत्रालय तक इस मामले में पक्षकार नहीं है, फिर भी दिशा-निर्देश मांगे जा रहे हैं। ऐसा लगता है कि कोई एयर प्यूरीफायर के बाजार में एकाधिकार चाहता है।

केंद्र ने साफ किया कि GST से जुड़े फैसले पूरी तरह GST काउंसिल के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जो एक संवैधानिक संस्था है और जिसमें सभी राज्य व केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं।

इस याचिका को वकील कपिल मदान ने दायर किया है। वे खुद अदालत में पेश हुए और कहा कि एयर प्यूरीफायर को गलत टैक्स कैटेगरी में रखा गया है।उनका तर्क था कि फरवरी 2020 की अधिसूचना के बाद कई मेडिकल डिवाइस Drugs and Cosmetics Act के तहत आते हैं और एयर प्यूरीफायर भी उसी दायरे में होने चाहिए।साफ हवा पर टैक्स लगाया जा रहा है, वो भी गलत तरीके से,
– कपिल मदान, याचिकाकर्ता

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GST काउंसिल का दखल जरूरी, कोर्ट सीधे आदेश नहीं दे सकता

केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि GST नीति पर फैसला लेने की एक तय प्रक्रिया है, जिसे अदालत के निर्देश से बाधित नहीं किया जा सकता।ASG ने कहा,अगर हर कोई अदालत आकर टैक्स कम करवाने लगे, तो यह पैंडोरा बॉक्स खोलने जैसा होगा।”

उन्होंने यह भी बताया कि 12 दिसंबर को एक संसदीय स्थायी समिति ने इस विषय पर प्रस्ताव पास किया है और सरकार इसे पहले से ही विचाराधीन रखे हुए है।

हालांकि कोर्ट ने केंद्र के तर्क सुने, लेकिन उसने महंगाई और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता भी जताई।जस्टिस विकास महाजन ने टिप्पणी की,दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए यह सवाल उठता है कि एयर प्यूरीफायर पर 5% GST क्यों नहीं हो सकता। इनकी कीमत 10–12 हजार से शुरू होकर 60 हजार तक जाती है, जो आम आदमी की पहुंच से बाहर है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभी कोई अंतिम राय नहीं बनाई गई है। यह केवल प्रारंभिक (prima facie) अवलोकन है।बेंच ने कहा कि अंतिम निर्णय GST काउंसिल को ही लेना होगा और इस स्तर पर कोर्ट सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगा।

अगली सुनवाई 9 जनवरी 2026 को

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को 10 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब (counter affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को भी जवाब दाखिल करने का मौका मिलेगा।मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी 2026 को तय की गई है।

Mission Aditya

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